नागौर जिले की ग्राम पंचायत गगवाना के खेतोलाव गांव में पिछले डेढ़ साल से पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे गया। सोमवार को ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा और समस्या के स्थायी समाधान की मांग की। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया- गांव की मुख्य ट्यूबवेल पिछले 18 महीनों से बंद पड़ी है। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि मरम्मत के दौरान कर्मचारियों ने पाइपों को आधा बाहर ही छोड़ दिया, जिससे समस्या और विकट हो गई। रिबोर के नाम पर केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। ग्रामीण बोले- टैंकर डलवाने पड़ रहे ज्ञापन में बताया कि पंचायत द्वारा करीब डेढ़ लाख रुपए की लागत से निर्मित जीएलआर पिछले डेढ़ साल से सूखा पड़ा है। पानी की एक बूंद भी वहां नहीं पहुंचने से सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। और ग्रामीण प्यासे हैं। भीषण गर्मी के बीच मवेशियों के लिए बनी खेलियां भी सूख चुकी हैं। मजबूरी में ग्रामीणों को महंगे दामों पर निजी टैंकर डलवाने पड़ रहे हैं, जो हर किसी के बस की बात नहीं है। जीएलआर सूखे पड़े ग्रामीणों ने कहा कि सहायक अभियंता की ओर से ट्यूबवेल के ड्राई होने और जल जीवन मिशन से आपूर्ति का तर्क दिया जा रहा है, जबकि हकीकत यह है कि गांव की खेलियां और जीएलआर आज भी पूरी तरह खाली हैं। पानी के अभाव में ग्रामीण और मवेशी दोनों बेहाल हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे।