नागौर में एक किसान ने कलेक्ट्रेट के बाहर आत्मदाह की चेतावनी दे दी। किसान ने आरोप लगाया कि कोर्ट स्टे के बावजूद उसके खेत की तारबंदी तोड़कर रास्ता निकाल दिया गया। उसने प्रशासन पर आरोपी के साथ मिलीभगत करने के आरोप लगाए। बुधवार को किसान कलेक्ट्रेट पहुंचा और ज्ञापन दिया। इस मामले पर खींवसर SDM सुनील पंवार का कहना है कि राजस्व टीम मौके पर गई थी। पहले ही रास्ता खुला हुआ था। टीम ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं की। जिले के खींवसर उपखंड के गांव हमीराणा गांव के किसान अर्जुन पुत्र मोहनराम राव ने ज्ञापन में बताया- गांव में मेरी खातेदारी की जमीन (खसरा नंबर 903 और 904) में पड़ोसी खातेदार सवाई सिंह काफी समय से रास्ता देने की मांग कर रहा था। मैं और मेरा परिवार मजदूरी के लिए हिमाचल प्रदेश गए हुए थे, इसी दौरान सवाई सिंह ने मिलीभगत कर रास्ता घोषित करा लिया। इसके बाद मैंने उपखंड अधिकारी के आदेश के खिलाफ राजस्व अपील प्राधिकारी (नागौर) में अपील दायर की। वहां से 29 जून 2026 को आदेश की पालना पर स्थगन (स्टे) मिल गया। इसके बावजूद प्रशासनिक अमला, पुलिस और जेसीबी मशीन के साथ सवाई सिंह मौके पर पहुंचा और खेत में खड़ी फसल नष्ट कर दी। मेरे खेत की तारबंदी उखाड़ दी और पट्टियां भी तोड़ दी। पीड़ित किसान ने चेतावनी दी कि यदि मामले का निष्पक्ष निस्तारण नहीं हुआ तो वह जिला मुख्यालय पर आत्मदाह करने को मजबूर होगा। धमकाने-झूठे प्रकरण दर्ज कराने का आरोप किसान ने बताया- कार्रवाई का विरोध किया तो महिलाओं-बच्चों की बात भी नहीं सुनी गई। उन्हें जेल भेजने की धमकी दी। झूठी शिकायत के आधार पर हमें पाबंद कर नोटिस जारी कर दिया। पुलिस के जरिए भी दबाव बनाया। निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग पीड़ित ने जिला कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। उसने कहा- दोषी अधिकारियों और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाए। नुकसान का मुआवजा दिलाया जाए और न्याय सुनिश्चित किया जाए।