नगर परिषद के नवनिर्वाचित बोर्ड की पहली साधारण सभा शुक्रवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक में शहर की सफाई व्यवस्था, टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और वार्डों के विकास कार्यों को लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए। इस दौरान पार्षदों के बीच तीखी बहस हो गई। वहीं, उपसभापति हाजी मोहम्मद कुरैशी के वायरल माफी वाले ऑडियो का मुद्दा उठने पर सदन का माहौल फिर गरमा गया। स्थिति बिगड़ने पर माइक बंद कर दिया गया और बैठक अचानक स्थगित कर दी गई। बैठक के बीच में समाप्त होने पर कई पार्षदों ने नाराजगी जताते हुए इसे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का अपमान बताया। नगर परिषद सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता सभापति संतोष टाक और उपसभापति हाजी मोहम्मद कुरैशी ने की। आयुक्त अनीता बिरधा सहित पक्ष-विपक्ष के पार्षद मौजूद रहे। शुरुआत में सभापति, उपसभापति और पार्षदों का माला व साफा पहनाकर स्वागत किया गया। लेकिन स्वागत के बाद विकास के मुद्दों पर चर्चा शुरू होते ही सदन का माहौल बदल गया। सफाई और टेंडर पर सवाल, निर्दलीय पार्षद से भिड़ंत बैठक में पार्षद फूलचंद टाक ने सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कई वार्डों में सफाई टिपर और कर्मचारी नियमित रूप से नहीं पहुंच रहे हैं। उन्होंने नगर परिषद में उपलब्ध सफाई टिपरों की संख्या पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूर्व में जारी टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर नए सिरे से पारदर्शी तरीके से टेंडर जारी करने की मांग की। उनका सुझाव था कि टेंडर की कॉपी सूचना बोर्ड पर कम से कम 15 दिन तक चस्पा की जाए, ताकि सभी को इसकी जानकारी मिल सके। सफाई कर्मचारियों के भुगतान में संबंधित वार्ड पार्षद के हस्ताक्षर अनिवार्य करने का सुझाव भी दिया। इसी दौरान निर्दलीय पार्षद मनीष कच्छावा ने उनके सवालों पर जवाब दिया। इस पर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और सदन में हंगामा हो गया। वायरल माफी वाले ऑडियो पर फिर गरमाया माहौल बैठक में उपसभापति हाजी मोहम्मद कुरैशी का हाल ही में वायरल हुआ माफी वाला ऑडियो भी विवाद का मुद्दा बना। भगवान श्रीराम की आरती से जुड़े इस ऑडियो को लेकर पार्षद मीकू राव उर्फ शिवकुमार राव ने सदन में सवाल उठाए। मुद्दे पर चर्चा शुरू होते ही माहौल फिर गरमा गया। इसी बीच माइक बंद कर दिया गया और बैठक को अचानक स्थगित कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद नगर परिषद की पहली साधारण सभा अधूरी रह गई। पार्षद बोले- बिना प्रक्रिया बैठक स्थगित करना अपमान बैठक स्थगित होने के बाद सभापति और आयुक्त के सभागार से चले जाने पर कुछ पार्षदों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बैठक समाप्त करने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। बिना स्पष्ट सूचना और चर्चा पूरी किए बैठक स्थगित करना निर्वाचित पार्षदों का अपमान है। पार्षदों ने कहा कि सदन में जनहित और विकास के मुद्दों पर अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। जब उनकी बात सुनने का समय ही नहीं है तो ऐसी बैठक में शामिल होने का क्या औचित्य है। शहर के विकास से जुड़े इन प्रस्तावों पर होनी थी चर्चा