अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक भगवान नृसिंह का प्राकट्य उत्सव आज नागौर शहर में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। नृसिंह चतुर्दशी के अवसर पर शहर के बंशीवाला मंदिर और बाठाडियां चौक सहित करीब 20 प्रमुख मंदिरों में खास आयोजन हुए, जिसे देखने के लिए शहरवासी उमड़े। ​बंशीवाला मंदिर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान जब भगवान नृसिंह ने खंभ फाडकर दर्शन दिए, तो पूरा परिसर 'नृसिंह भगवान की जय' के उद्घोष से गूंज उठा। कलाकारों ने सजीव अभिनय के माध्यम से हिरण्यकश्यप वध और भक्त प्रह्लाद की रक्षा के प्रसंग को जीवंत किया। विशेष रूप से भारी मुखौटा और पारंपरिक वेशभूषा धारण किए कलाकारों की ऊर्जा और भक्ति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ​आयोजन समिति के अमित व्यास और बद्रीप्रसाद छंगाणी के अनुसार, इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। नागौर की इस सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा बनने के लिए बडी संख्या में प्रवासी राजस्थानी भी अपने पैतृक शहर पहुंचे। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और स्वयंसेवकों ने मुस्तैदी दिखाई। देर रात तक चले इन आयोजनों के साथ ही शहर में कई दिनों से चल रहा उत्सव संपन्न हुआ। ​नगर सेठ बंशीवाला मंदिर सहित शहर के 20 विभिन्न स्थानों पर रम्मतों का सफल समापन हुआ। मुख्य आयोजन को देखने के लिए उमडे ऐतिहासिक जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, पेयजल और चिकित्सा के पुख्ता इंतजाम किए थे। पूरे दिन विशेष पूजा-अर्चना और आरती के बाद शाम को आयोजित दिव्य मंचन ने शहर के धार्मिक वातावरण को और अधिक प्रभावी बना दिया। ​कठिन साधना के बाद कलाकार देते हैं प्रस्तुति ​कई दिनों के कठिन अभ्यास के बाद कलाकारों ने नृसिंह अवतार की भूमिका को निभाया। भारी मुखौटों और पारंपरिक आभूषणों के साथ कलाकारों का शारीरिक संतुलन और विशेष गर्जना आकर्षण का केंद्र रही। परंपरा और अटूट श्रद्धा के इस संगम ने महोत्सव को बेहद यादगार बना दिया, जिसमें कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं से उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्तिमय कर दिया।