आरपीएससी की ओर से आरएएस-2024 का रिजल्ट जारी कर दिया है। इसमें डीडवाना-कुचामन जिले के गूगड़वार निवासी कैलाश रणवा ने टॉप 20 में जगह बनाते हुए 16वीं रैंक हासिल की हैं। कैलाश रणवा ने बताया कि इंटरव्यू में उनसे राजस्थान की सब्जियों के बारे में जिक्र करते हुए कहा कि-यहां की पांच सब्जियों के नाम बताओ। इसके साथ ही बाल विवाह और पीसीपीएनडीटी एक्ट के बारे में भी सवाल किए। इस रिजल्ट में नागौर शहरके रहने वाले अभिषेक अमरावत ने 21 वीं रैंक हासिल की है। नागौर के ही ढाढ़रिया कलां की पारुल चौधरी ने 59वीं रैंक हासिल की है।
कैलाश अभी राजस्थान पुलिस एकेडमी ले रहे हैं ट्रेनिंग कैलाश वर्तमान में आरपीएस के पद पर ट्रेनिंग ले रहे हैं और यह उनका तीसरा प्रयास था। इससे पहले 2021 में अपने पहले प्रयास में उन्होंने 659वीं रैंक हासिल की थी, जबकि 2023 के नतीजों में उन्हें 46वीं रैंक मिली थी। पिछले साल उनका सिलेक्शन सिस्टेंट प्रोफेसर जियोग्राफी के पद पर भी हुआ था, लेकिन आरएएस में चयन होने के कारण उन्होंने वहां जॉइन नहीं किया। कैलाश ने बताया कि मेरी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से ही हुई है। इसके बाद 9वीं से 12वीं तक मैं कुचामन के गीतांजलि स्कूल में पढ़ा। ग्रेजुएशन मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से भूगोल ऑनर्स में की, जहां मैं एनसीसी कैडेट भी रहा। फिर अजमेर की एमडीएस यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन पूरी की। बोल-इंटरव्यू में अलग-अलग कानून के बारे में पूछा कैलश ने बताया कि इस बार कानून (Acts) और केस स्टडीज पर ज्यादा सवाल थे। जैसे महिलाओं से संबंधित कानून, बाल विवाह, पीसीपीएनडीटी एक्ट और शव को लेकर धरना देने वाले नए कानून पर सवाल हुए। पीसीपीएनडीटी एक्ट पर काफी चर्चा हुई कि यह कैसे जेंडर न्यूट्रल है। कैलाश ने बताया कि PCPNDT के बारे में जब पूछा जाता है तो अक्सर लोगों का जवाब केवल जो कानून है या जो भ्रूण हत्या पर रहता है। मुझसे जब सवाल किया तो मेरा जवाब था- PCPNDT इस लिए बनाया गया है ताकि लिंग का परिक्षण ही ना हो। परिक्षण ही नहीं होगी तो भ्रूण हत्या अपने आप रुक जाएगी। कैलाश रणवा ने बताया कि मुझसे पांच राजस्थानी व्यंजन के नाम पूछे गए जिसमें मेने गट्टे की सब्जी, दाल बाटी चूरमा,पंचकुटा, हल्दी की सब्जी और केर सांगरी जवाब दिया था। पिता का जालोर में ग्रेनाइट का बिजनेस कैलाश के पिता पहले किसान थे, अब जालोर में उनका ग्रेनाइट का व्यवसाय है। कैलाश ने बताया कि परिवार ने कभी आर्थिक तंगी महसूस नहीं होने दी। हम चार भाई-बहन हैं और हम सबको बराबर पढ़ाया गया। मैं सबसे बड़ा हूं और बाकी तीनों अभी तैयारी कर रहे हैं। मेरे मामा उमाराम चौधरी, जो अभी गुजरात में जीएसटी विभाग में सुपरिटेंडेंट हैं। उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने ही मुझे दिल्ली जाकर पढ़ने के लिए मोटिवेट किया और पूरी यात्रा में मेरा साथ दिया।
नागौर के रहने वाले अभिषेक ने राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित आरएस भर्ती परीक्षा में अपनी सफलता का परचम लहराया है। अभिषेक ने अपने दूसरे प्रयास में 21वीं रैंक हासिल की है। पहले अटेम्प्ट में भी उनको 454 वीं रैंक हासिल हुई थी जिसके बाद उन्हें कोआपरेटिव इंस्पेक्टर की पोस्ट मिली थी। लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं की। वर्तमान में वे द्वितीय श्रेणी शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अभिषेक ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अक्टूबर 2025 में ही वरिष्ठ शिक्षक के पद पर ज्वाइन किया था। उनकी शिक्षा की यात्रा संघर्षपूर्ण रही है। वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी बीएड की पढ़ाई पूरी की थी। 23 वर्षीय अभिषेक का झुकाव सिविल सेवा की ओर स्कूल के समय से ही हो गया था, जब उनकी शैक्षणिक प्रतिभा के लिए उन्हें जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक द्वारा सम्मानित किया गया था।
अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने माता-पिता के आशीर्वाद और उनके सहयोग को दिया है। अभिषेक के पिता पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और वर्तमान में नागौर में पदस्थापित हैं। अभिषेक ने अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में साझा करते हुए कहा कि वे यहीं नहीं रुकने वाले और अब उनका अगला लक्ष्य यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण करना है। फिलहाल वे अपनी ड्यूटी के सिलसिले में सीकर जिले के नेछवा क्षेत्र के पास किड़निया गांव में हैं।
इंटरव्यू में पूछा AI समिट में हुए विरोध प्रदर्शन का सवाल अभिषेक ने बताया कि उनसे इंटरव्यू में अधिकांश सवाल करंट अफेयर्स से रिलेटेड ही थे। उस समय ईरान युद्ध शुरू नहीं हुआ था और प्रधानमंत्री इजराइल के दौरे पर गए हुए थे। इस बारे में मुझे पूछा गया था।
आपसे इंटरव्यू में अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े क्या सवाल पूछे गए थे?
अभिषेक : मुझसे ईरान और यूएसए के बीच चल रहे संघर्ष पर सवाल पूछे गए थे। साथ ही, उससे ठीक दो दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी की जो इजराइल यात्रा हुई थी, उसके उद्देश्यों और रणनीतिक कारणों के बारे में पूछा गया था। मुझसे पूछा गया कि यदि ईरान और यूएसए के बीच युद्ध होता है, तो ईरान की स्थिति क्या रहेगी?
मैंने जवाब दिया कि ईरान की भौगोलिक स्थिति, विशेष रूप से 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के कारण उसे वेनेजुएला की तरह आसानी से दबाया या कैप्चर नहीं किया जा सकेगा। वह अपनी रणनीतिक स्थिति की वजह से मजबूत रहेगा और अंततः दोनों पक्षों को वार्ता की मेज पर आना ही पड़ेगा।
आपकी टीचिंग जॉब की पृष्ठभूमि को देखते हुए शिक्षा नीति पर क्या चर्चा हुई?
अभिषेक: मुझसे नई शिक्षा नीति (NEP) के 5+3+3+4 फार्मूले के बारे में विस्तार से पूछा गया था।
राजस्थान में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को आप एक प्रशासनिक अधिकारी (SDM) के रूप में कैसे रोकेंगे?
अभिषेक: मैंने इसके लिए दो मुख्य उपाय बताए: पहला, बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान (Awareness Campaigns) चलाना और दूसरा, नशे के नेटवर्क और तस्करों की सप्लाई चेन को क्रैक करके उसे पूरी तरह तोड़ने का प्रयास करना।
'इंडिया एआई समिट' (India AI Summit) के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन पर आपकी क्या राय थी?
अभिषेक: मेरा मानना था कि विरोध करने वालों का मंच गलत था। जब भारत इतने बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय समिट आयोजित कर रहा हो, तो देश की प्रतिष्ठा का ध्यान रखना चाहिए। अपनी मांगें उचित माध्यम से सरकार तक पहुंचानी चाहिए न कि ऐसे वैश्विक आयोजनों में बाधा डालकर।
सिविल सेवा में 'सत्यनिष्ठा' (Integrity) का क्या महत्व है और आप इसे कैसे सुनिश्चित करेंगे?
अभिषेक: मैंने जवाब दिया कि मैं 'नोलन कमेटी' द्वारा निर्धारित सात सिद्धांतों को अपने जीवन और कार्यशैली में उतारने का प्रयास करूंगा।
नोलन कमेटी के वे सात सिद्धांत कौन से हैं?
अभिषेक: वे सात सिद्धांत हैं: वस्तुनिष्ठता (Objectivity), पारदर्शिता (Openness), ईमानदारी (Honesty), जवाबदेही (Accountability), सत्यनिष्ठा (Integrity), निस्वार्थता (Selflessness) और नेतृत्व (Leadership)।
यूपीएससी के सपने से आरएएस में सफलता: पारुल चौधरी ने हासिल की 59वीं रैंक आरएएस परीक्षा 2024 में नागौर की पारुल चौधरी ने 59वीं रैंक हासिल की है। पारुल का यह सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई के दौरान ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन वहां मनचाही सफलता न मिलने पर उन्होंने अपना पूरा ध्यान राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) की ओर केंद्रित किया। पारुल का यह दूसरा प्रयास था। अपने पहले प्रयास (2023) में उन्होंने 193वीं रैंक प्राप्त की थी और वर्तमान में वे एचसीएम रीपा में अकाउंट सर्विस की ट्रेनिंग ले रही हैं। पारुल का कहना है कि चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, पढ़ाई और मेहनत का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। उनके पिता एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं और माता गृहणी हैं। परिवार में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद पारुल ने अपना धैर्य बनाए रखा और आज इस मुकाम पर पहुंची हैं। भविष्य में वे आरएएस सेवा में रहते हुए समय मिलने पर पुनः यूपीएससी देने का विचार भी रखती हैं।
इंटरव्यू में पूछे गए प्रमुख सवाल और जवाब पारुल चौधरी के इंटरव्यू के दौरान उनके शैक्षणिक बैकग्राउंड (जूलॉजी ऑनर्स), सामाजिक मुद्दों और प्रशासनिक स्थितियों पर आधारित कई सवाल पूछे गए। 1. महिला सुरक्षा और सामाजिक चुनौतियां सवाल: राजस्थान सरकार ने महिलाओं के लिए कौन सी योजनाएं शुरू की हैं और आपके अनुसार महिलाएं किन समस्याओं का सामना कर रही हैं? पारुल चौधरी: महिलाओं के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। मुख्य समस्याओं में पितृसत्तात्मक मानसिकता (Patriarchal Mindset), बालिकाओं का उच्च ड्रॉपआउट रेट, सुरक्षा संबंधी मुद्दे और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में 'मेंस्ट्रुअल पॉवर्टी' (Menstrual Poverty) शामिल हैं। 2. वन्यजीव और पर्यावरण (जूलॉजी बैकग्राउंड पर आधारित) सवाल: बंदरों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए आप क्या सुझाव देंगी? पारुल चौधरी: बंदरों और आवारा पशुओं की आबादी को नियंत्रित करने के लिए 'एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स' के तहत नसबंदी (Sterilization) जैसे प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं। सवाल: बायोस्फीयर रिजर्व और वेटलैंड्स क्या होते हैं? पारुल चौधरी: (पारुल ने इन दोनों की तकनीकी परिभाषा और उनके पारिस्थितिक महत्व के बारे में विस्तार से समझाया)। 3. सिचुएशन बेस्ड सवाल (प्रशासनिक क्षमता) सवाल: यदि आप किसी उपखंड की एसडीएम हैं और वहां दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क जाती है, तो आपका 'प्लान ऑफ एक्शन' क्या होगा? पारुल चौधरी: सबसे पहले उच्चाधिकारियों को सूचित कर पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। शांति की अपील के साथ-साथ समुदाय के नेताओं से संवाद स्थापित किया जाएगा ताकि जड़ का पता चल सके। यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती है, तो बीएनएस (BNS) की धारा 163 लागू की जाएगी। 4. आर्थिक मुद्दे (गरीबी का मापन) सवाल: गरीबी को कैसे मापा जाता है और एमपीआई (MPI) के पैरामीटर्स क्या हैं? पारुल चौधरी: गरीबी मापन के लिए भारत में सुरेश तेंदुलकर समिति जैसी विभिन्न समितियों ने अलग-अलग स्केल निर्धारित किए हैं। मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) के मापन में शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर जैसे महत्वपूर्ण मानकों को देखा जाता है।