भास्कर संवाददाता| डूंगरपुर राज्य सरकार की पंचायत समिति नंदीशाला जन सहभागिता योजना को लेकर जारी गाइडलाइन में निर्देश दिए गए हैं कि हर पंचायत समिति स्तर पर नंदीशाला स्थापित कर निराश्रित नर गोवंश को सड़कों से हटाया जाए। लेकिन, जमीनी हकीकत इन निर्देशों के बिल्कुल उलट नजर आ रही है। बजट घोषणा में वर्ष 2021-22 में 1.57 करोड़ रुपए की लागत से नंदीशाला बनाने का प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद जिले के साबला पंचायत समिति क्षेत्र में अभी जमीन तक आवंटित नहीं हो सकी है। जबकि, सागवाड़ा में निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। गाइडलाइन के अनुसार नंदीशाला के लिए भूमि उपलब्ध कराना पहली और अनिवार्य शर्त है। लेकिन, साबला में यही प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। इससे साफ है कि योजना की शुरुआत ही नियमों के विपरीत हुई। न तो जमीन चिन्हित हुई और न ही निर्माण एजेंसी तय हो सकी, जिसके चलते योजना ठप पड़ी है। गाइडलाइन में यह भी उल्लेख है कि तीन वर्षों के भीतर योजना को पूरा कर कम से कम 250 निराश्रित नंदी को आश्रय देना होगा। साथ ही सड़कों से घुमंतु गोवंश को नंदी शालाओं में स्थानांतरित करना अनिवार्य किया गया है। लेकिन, क्षेत्र में आज भी नंदी खुले में सड़कों पर घूम रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। डूंगरपुर. सागवाड़ा में चल रहा नंदीशाला का काम। विभाग से दो साल पूरे होने के बाद भी जमीन संबंधी दस्तावेज को पूरा नहीं किया। जिन संस्थाओं ने आवेदन किया उनसे जानकारी मिली कि साबला पंचायत समिति के पिंडावल ग्राम पंचायत में जमीन आंवटित कर दी गई थी, लेकिल विभाग की निष्क्रियता के कारण समय जमीन के दस्तावेज और चयनित संस्थाओं को सहयोग नहीं मिला। इसके चलते प्रक्रिया का समय पूरा हो गया और योजना सिर्फ कागजों में धरी रह गई। डूंगरपुर. साबला में सड़क पर विचरते नंदी। ^मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। पूरी जानकारी लेकर गौ संरक्षण का लाभ दिलाया जाएगा। मामले की जानकारी लेकर जल्द कार्रवाई करेंगे। - देशलदान, कलेक्टर,डूंगरपुर सागवाड़ा में काम शुरू होना यह साबित करता है कि योजना को लागू करना संभव था। लेकिन, साबला में देरी केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। नंदीशाला के लिए पर्याप्त भूमि होना पहली शर्त है। जबकि, साबला में यही बुनियादी काम पूरा नहीं हो सका। इससे न केवल निर्माण रुका, बल्कि पूरी योजना का उद्देश्य ही अधूरा रह गया। एक ही जिले में दो अलग-अलग तस्वीरें यह दिखाती हैं कि कहीं नियमों का पालन हो रहा है, तो कहीं पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। नंदीशाला में बेसहारा और घुमंतु नंदियों के संरक्षण के लिए समुचित व्यवस्थाएं की जाएंगी। यहां पशुओं के लिए सुरक्षित शेड, हरा चारा, साफ पेयजल और नियमित पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बीमार और घायल नंदियों के उपचार के लिए अलग प्रबंधन रहेगा। परिसर में बाड़बंदी, पानी की टंकियां और चारा भंडारण की व्यवस्था भी होगी। साथ ही गोबर के निस्तारण और उपयोग के लिए योजनाबद्ध सिस्टम विकसित किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य सड़कों पर घूम रहे नंदियों को सुरक्षित आश्रय देकर दुर्घटनाओं को रोकना और गौ संरक्षण को मजबूत करना है। ^जिले में साबला और सागवाड़ा में नंदीशाला बनाना प्रस्तावित है। इसमें सागवाड़ा में 10 प्रतिशत हिस्से का काम शुरू कर दिया गया है। लेकिन, साबला में जमीन नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया है। - डॉ. दिनेश बामनिया, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग