गौ माता को 'राष्ट्रमाता' का संवैधानिक दर्जा देने और देशव्यापी गौ-हत्या निषेध कानून लागू करने की मांग को लेकर सोमवार को एक बड़ा आंदोलन हुआ। 'गो सम्मान आह्वान अभियान' के तहत देशभर के लगभग 5400 स्थानों पर साधु-संतों और गौ-भक्तों ने प्रदर्शन कर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे। इसी कड़ी में डीडवाना जिला मुख्यालय पर भी बड़ी संख्या में गौ-भक्त और सनातन धर्मावलंबी एकत्र हुए। साधु-संतों के सानिध्य में विधि-विधान से गौ-पूजन किया गया, जिसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार ओमप्रकाश को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान परिसर 'गौ माता की जय' और 'गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करो' के नारों से गूंज उठा। ज्ञापन में गौ-वंश संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं। इनमें संविधान के अनुरूप गौ-वंश को 'राष्ट्रमाता' या 'राष्ट्र आराध्या' का दर्जा देना, गौ-संरक्षण के लिए केंद्र में अलग मंत्रालय का गठन करना, गौ-हत्या को गैर-जमानती अपराध बनाकर आजीवन कारावास जैसे कड़े प्रावधान लागू करना शामिल है। इसके अतिरिक्त स्कूली पाठ्यक्रम में 'गौ-विज्ञान' को शामिल करने और गौ-तस्करी में लिप्त वाहनों की जब्ती कर उनसे प्राप्त राशि को गोशालाओं के उपयोग में लाने का प्रस्ताव भी दिया गया। तहसीलदार ओमप्रकाश ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का विशेष स्थान है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन मांगों को प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया जाएगा। अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक व्यापक जन-आंदोलन है, जो अपनी मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा। साधु-संतों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका मानना है कि गौ-संरक्षण का मुद्दा अब एक देशव्यापी सामाजिक अभियान बन चुका है।