डीडवाना-कुचामन जिले के नावां क्षेत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का आंदोलन तेज हो गया है। प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार के तहत 14 जुलाई से आंगनवाड़ी केंद्रों पर तालाबंदी जारी है। गुरुवार को कार्यकर्ताओं ने बाग के गणेश मंदिर से उपखंड कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला और मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी हुक्मीचंद रुलानिया को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार और विभाग द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंगनवाड़ी केंद्रों पर तालाबंदी जारी रहेगी। आंदोलन के कारण विभागीय कार्यों के प्रभावित होने की जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी। कार्यकर्ताओं की 14 सूत्रीय मांगों में नियमित कर्मचारी घोषित करना, न्यूनतम 26 हजार रुपए मासिक मानदेय, समय पर वेतन भुगतान, बिजली एवं गैस बिल का भुगतान विभाग द्वारा कराना, अन्य विभागों के कार्यों से मुक्ति, स्कूलों के समान अवकाश, 5जी स्मार्टफोन उपलब्ध कराना, यात्रा भत्ता, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपए ग्रेच्युटी और मानदेय के आधे हिस्से के बराबर पेंशन शामिल हैं। संघ की जिलाध्यक्ष मंजू देवी ने बताया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का भुगतान वर्ष 2022 से लंबित है। इसके अतिरिक्त मोबाइल रिचार्ज, सामुदायिक उत्सव और ऑनलाइन-ऑफलाइन कार्यों के प्रोत्साहन (इंसेंटिव) की राशि भी कई महीनों से बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को केवल 11 माह का मानदेय दिया जाता है और फरवरी माह का भुगतान बैंक खातों में दर्ज नहीं किया जाता। मंजू देवी ने यह भी बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उपयोग होने वाली टीएलएम सामग्री भी कर्मचारियों को अपने खर्च पर खरीदनी पड़ती है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि अगले पांच दिनों में मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं और अन्य महिला कर्मचारी कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और सरकार की होगी।