राज्य में हरियाली बढ़ाने के नाम पर वन विभाग ने जो पौधरोपण कराया, उसमें भारी भ्रष्टाचार सामने आया है। विभाग को पिछले 4 साल में विभिन्न योजनाओं में 246 साइट्स पर पौधे रोपने थे, लेकिन ज्यादातर जगह लीपापोती कर दी गई। इनमें से 48 साइट पर नाम मात्र के पौधे लगाए गए। कुछ साइट्स पर पौधे लगाना तो दूर, गड्ढे ही नहीं खोदे गए। एक साइट पर पौधरोपण का एरिया ही कम कर दिया गया। इन साइट्स पर कागजों में लाखों पौधे लगाए गए, लेकिन मौके पर पौधों का नामोनिशान नहीं है। इसके बावजूद भुगतान पूरा उठाया गया। निगरानी एवं मूल्यांकन मॉड्यूल के तहत पौधरोपण साइट्स का मूल्यांकन हुआ तो इस भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। इनमें अजमेर की एक साइट पर तो प्लांटेशन एरिया ही कम पाया गया। गड़बड़ी सामने आने पर अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रबोधन एवं मूल्यांकन) उदयशंकर ने संबंधित संभागीय मुख्य वन संरक्षकों को पत्र भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी फाइलें दबाकर बैठ गए। हर पौधे के लिए पांच साल तक मिलता है बजट वन विभाग केम्पा, आरडीएफएल, चारागाह विकास, आईजीएचपी, नाबार्ड, आरटीआर सहित अन्य योजनाओं में पौधरोपण करवाता है। इनमें से सबसे छोटे स्तर पर आरएफबीपी-2 योजना का ही उदाहरण लें तो इसमें 50 हेक्टेयर की एक साइट में लगभग 10 हजार पौधे लगाने का नियम है। इसमें 5 साल के लिए करीब 42 लाख रुपए बजट मिलता है। इसी तरह आरएफबीपी-1 के तहत 50 हेक्टेयर में 25 हजार पौधे लगाने का नियम है, जिसके लिए 5 साल में 51 लाख रुपए बजट मिलता है। ऐसे में आरएफबीटी-2 योजना के तहत पौधरोपण का हिसाब लगाया जाए तो 246 साइट के हिसाब से यह 102 करोड़ से अधिक होता है। 215 साइट पर काम और एक में एरिया ही कम अजमेर-टोंक में 5 प्लांटेशन साइट, सीसीएफ भरतपुर कार्यालय के अधीन भरतपुर, धौलपुर, करौली और सवाई माधोपुर डिविजन में 46, दौसा में 2, सीसीएफ जयपुर के अधीन जयपुर, जयपुर नॉर्थ, दौसा, सीकर, झुंझुनूं और अलवर में 45, सीसीएफ बीकानेर कार्यालय के अधीन श्रीगंगानगर, चूरू, चित्तौड़गढ़, बीकानेर, हनुमानगढ़ में 67, सीसीएफ अजमेर के अधीन टोंक/अजमेर, भीलवाड़ा में 21, केम्पा योजना में जयपुर, झुंझुनूं और सवाई माधोपुर में 4, सीसीएफ जोधपुर कार्यालय के अधीन बाड़मेर, जैसलमेर और सिरोही में 4, पीसीसीएफ डेवलपमेंट के अधीन जयपुर/अलवर में 2 साइट्स पर स्वीकृति से काफी कम काम किया गया। इसी प्रकार केम्पा योजना में जयपुर, झुंझुनूं, सवाई माधोपुर की 6 प्लांटेशन साइट शामिल हैं। 48 डिविजन में पूरी तरह फेल सीसीएफ कोटा कार्यालय के अधीन बारां, कोटा और झालावाड़ डिविजन में 18 साइट, कोटा में 1, एपीसीसीएफ (केम्पा) योजना के डूंगरपुर डिविजन के अधीन 2, सीसीएफ जोधपुर कार्यालय के अधीन जालोर-सिरोही में 4, सीसीएफ कार्यालय उदयपुर के अधीन उदयपुर (दक्षिण) में 3, सीसीएफ अजमेर कार्यालय के अधीन 3, सीसीएफ उदयपुर के अधीन बांसवाड़ा डिविजन में 2, अजमेर और डब्ल्यूआई जयपुर में एक-एक सहित अन्य पौधरोपण साइट पूरी तरह फेल पाई गई। यूं मिलता है बजट पहले साल: गड्ढे खोदना, ट्रेंच, एमपीटी, माइक्रोपलान और पौधे तैयार करना दूसरे साल: पौधरोपण, नर्सरियों से पौधों का उठाव तीसरे साल: रखरखाव, 10% पौधों का रिप्लेसमेंट चौथे साल: चौकीदारी के लिए बजट पांचवें साल: पौधों की देखरेख के लिए।