आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब टीबी और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की शुरुआती पहचान को आसान बनाने में मदद करेगा। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) नई दिल्ली, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग और प्लाज्मा अनुसंधान संस्थान के सहयोग से DeepCXR 1.1 नाम का एआई टूल सीने की जांच के आधार पर बीमारियों की स्क्रीनिंग और पहचान में सहायता कर सकता है। इससे बड़ी आबादी की स्क्रीनिंग करने और संभावित मरीजों को समय रहते चिह्नित कर आगे की जांच व इलाज तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। नेपकॉन-2026 के दौरान बिरला ऑडिटोरियम में आयोजन समिति के चेयरमैन डॉ. महेंद्र बैनाड़ा और आयोजन सचिव डॉ. विनोद जोशी ने शनिवार को भास्कर को इसकी उपयोगिता के बारे में विशेष जानकारी दी। डॉ. विनोद जोशी के अनुसार इस टूल को राज्य सरकार से अनुमति मिल चुकी है। एआई आधारित स्क्रीनिंग से टीबी के अलावा सिलिकोसिस और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के संभावित मामलों की पहचान में मदद मिल सकती है। खर्राटों को सामान्य समझकर न करें नजरअंदाज, स्लीप एपनिया का हो सकता है संकेत : रात में सोते समय तेज खर्राटे आना भी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। नींद के दौरान सांस की नली बार-बार संकरी या बंद होने से सांस लेने में रुकावट आती है। इसे ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया कहा जाता है। इस स्थिति में शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है और गंभीर मामलों में हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खर्राटों के साथ नींद में सांस रुकना, बार-बार जागना, सुबह सिरदर्द और दिनभर सुस्ती जैसे लक्षण हों तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। समय पर पहचान और उपचार से गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। हार्ट अटैक मरीजों के लिए ‘फ्लूू वैक्सीन सुरक्षा कवच’ हार्ट अटैक झेल चुके मरीजों को फ्लू की वैक्सीन देने से एक साल के दौरान मृत्यु, दोबारा हार्ट अटैक या स्टेंट में खून का थक्का बनने का जोखिम 28 फीसदी तक कम हो जाता है। यह खुलासा आईएएमआई के सर्वे में हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि नियमित वैक्सीनेशन करवाने वाले मरीजों में दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा 28 फीसदी तक कम हो गया। अटैक के बाद मरीजों को दवाओं, खानपान, व्यायाम और नियमित जांच पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है, लेकिन अब संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण भी जीवन बचाने में देखभाल का अहम हिस्सा माना जा रहा है। यह जानकारी शनिवार को हार्ट इंटरनेशनल कान्फ्रेंस के दौरान डॉ. संजीव शर्मा और डॉ.पी.सी. मनोरिया ने दी। दूसरे दिन शनिवार को आधुनिक उपचार, जटिल एंजियोप्लास्टी और नई कार्डियक तकनीकों पर विभिन्न सत्र आयोजित हुए। इमेजिंग सत्र में डॉ. पेड्रो मोरेनो ने एंजियोप्लास्टी के नतीजे बेहतर बनाने में इमेजिंग की भूमिका, स्ट्रक्चरल हार्ट सिम्पोजियम में डॉ. नागेंद्र भूपति ने जटिल मामलों में टावर तकनीक और फ्यूचरिस्टिक थैरेपीज सत्र में डॉ. कुश भगत और डॉ. जितेंद्र मक्कड़ ने पल्स फील्ड एब्लेशन पर व्याख्यान दिया।