मुख्य सचिव की सख्ती के बाद भी प्रदेश की राजस्व अदालतों की प्रक्रिया में सुधार नहीं हो रहा है। कई राजस्व अदालतों में मौखिक आदेश के 10 दिन तक भी पक्षकारों को लिखित फैसला व उसकी नकल नहीं मिलती है। ताकि पक्षकार मामले को आगामी (उच्च) कोर्ट में नहीं ले जा सके। ऐसे फैसलों में मिलीभगत के आरोप भी लगते है। पक्षकार को जयपुर जिले सहित कई जिलों में राजस्व अदालतों में फैसलों को लेकर राजस्व विभाग के पास लगातार शिकायतें मिल रही है। इससे न्याय के सिद्धांत का खुला उल्लंघन हो रहा है। गौरतलब है कि पिछले दिनों मुख्य सचिव ने राजस्व कोर्टों की कार्य प्रणाली सुधारने को लेकर विस्तृत निर्देश जारी किए थे। राजस्व मुकदमों में सुनवाई में ही भू राजस्व अधिनियम के तहत कई तरह के प्रार्थना पत्र लगने के प्रावधान है। इनकी सुनवाई के बाद ही मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। लेकिन राजस्व कोर्ट में प्रार्थना पत्रों पर बहस सुन कर मौखिक आदेश पारित कर देते है। लेकिन नोटशीट पर लिखित फैसला नहीं लिखते है। कई सप्ताह तक पक्षकारों को फैसलों की नकल नहीं मिलती। ई-फाइल का दावा, लेकिन बदल देते नोटशीट: रेवेन्यू बोर्ड ने दावा कर रहे है कि ई-फाइल प्रणाली से सभी दस्तावेज सुरक्षित, समय व पारदर्शिता से भेजना और मंगवाना संभव हो पा रहा है। लेकिन हकीकत में राजस्व अदालतों में आगामी तारीख देखने की भी ऑनलाइन व्यवस्था नहीं है। कई राजस्व अदालतों में परिवादियों को समय पर तारीख भी नहीं बताई जाती है। इसके साथ ही पीठासीन अधिकारी की ओर से नोटशीट बदल कर गलत फैसलों की सैकड़ों शिकायतें राजस्व विभाग, रेवेन्यू बोर्ड व जिला प्रशासन स्तर पर पेडिंग है। राजस्व न्यायालयों में ऑनलाइन सिस्टम के बजाए वादी व प्रतिवादियों को ऑफलाइन नोटशीट की फाइलों पर ‘आगामी तारीख’ दी जा रही है। केवल रेवेन्यू बोर्ड के कोर्ट में ही पूर्णतया ऑनलाइन सिस्टम के जरिए आगामी तारीख दी जा रही है। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के सदस्यों की नियुक्ति के नियमों में बदलाव राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति से जुड़े 1971 के पुराने नियमों में बदलाव किया है। इसका मकसद राजस्व मंडल में सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी करना है। सरकार अब सदस्यों को राजस्व मंडल अजमेर में नियुक्ति के बावजूद जयपुर में बंगला उपलब्ध करवाएगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई व परिवार डिस्टर्ब नहीं हो। इसके अलावा सदस्य सर्किट हाउस में स्थायी रूप से ठहर सकेंगे। वहीं अध्यक्ष व सदस्यों को अतिरिक्त रूप से मूल वेतन का 15 प्रतिशत विशेष भत्ता भी दिया जाएगा। अधिवक्ता कोटे से नियुक्त सदस्य को पे लेवल एल-24 के अनुसार वेतन मिलेगा। 50 हजार रुपए प्रतिवर्ष पेंशन मिलेगी। इसके लिए पिछले माह सुधारात्मक प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। अब सरकार ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। सरकार ने अब नियुक्ति प्रक्रिया को ज्यादा सिस्टमैटिक, प्रोफेशनल और बैलेंस्ड बनाया है। नए नियमों के तहत अब सदस्यों की चयन प्रक्रिया के लिए हाई लेवल कमेटी बनाई गई है।