सावन और भादो के महीनों में जहां हर साल नदी-नाले उफान पर रहते थे, वहीं इस बार जुलाई और अगस्त का महीना सूखा ही बीत गया। उदयपुर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जैसे जल-समृद्ध माने जाने वाले जिलों में इस बार झमाझम बारिश की जगह निराशा ही हाथ लगी है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार मानसून की ट्रेन को बेपटरी करने में तीन बड़े मौसमी कारकों का हाथ रहा। अफ्रीका में बढ़ी गर्मी से बही हवाओं और वायुमंडलीय दबाव के बदले पैटर्न ने मानसूनी बादलों की सामान्य राह ही रोक दी। बता दें कि जिले में मानसून की दस्तक 3 जुलाई को हुई थी। विभाग का कहना है कि यह सितंबर के तीसरे सप्ताह तक विदा हो सकता है। 1. अरब सागर की शाखा पस्त, अफ्रीका की ओर खींची हवाएं जुलाई के पहले हफ्ते में अरब सागर से उठी मानसूनी शाखा बांसवाड़ा तक तो पहुंची, लेकिन उसके बाद पस्त पड़ गई। अफ्रीका में तापमान बढ़ने से वहां लो-प्रेशर जोन बन गया। इससे मानसूनी हवाएं राजस्थान की तरफ आने के बजाय पश्चिम (अफ्रीका) की ओर खिंच गईं। 2. बंगाल की खाड़ी के लो-प्रेशर का बदला रूट बंगाल की खाड़ी में बने मानसूनी सिस्टम इस बार राजस्थान के मध्य और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों तक पहुंच ही नहीं पाए। ये सिस्टम ओडिशा, मध्य प्रदेश और गुजरात से होते हुए सीधे अरब सागर में समा गए, जिससे हमारा अंचल प्यासा रह गया। 3. बेमौसम आए पश्चिमी विक्षोभ ने बिगाड़ा गणित आमतौर पर सर्दियों में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ इस बार मानसून सीजन में भी लगातार सक्रिय रहे। इनकी सूखी पश्चिमी हवाओं ने मानसूनी बादलों को पूर्वी राजस्थान तक ही सीमित कर दिया, जिससे दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान में बारिश का कोटा अधूरा रह गया। एक्सपर्ट- आरएस देवड़ा, मौसम वैज्ञानिक उम्मीद अभी बाकी, आठ साल में दो बार अक्टूबर में विदा हुआ मानसून मानसून भले ही अपने अंतिम पड़ाव पर हो, लेकिन अंचल के लिए उम्मीद यह है कि विदाई से पहले अक्सर एक मजबूत मानसूनी स्पेल देखने को मिलता है। बीते 8 साल के आंकड़े गवाह हैं कि मानसून कई बार सितंबर के आखिरी हफ्ते और अक्टूबर की शुरुआत तक ठहरा रहा है। ऐसे में मौसम में हल्का बदलाव होते ही जाते-जाते बादल झमाझम बरसाकर जलस्रोतों को राहत दे सकते हैं। बता दें, साल 2025 में 15 सितंबर, 2024 में 23 सितंबर, 2023 में 25 सितंबर, 2022 में 22 सितंबर, 2021 में 6 अक्टूबर, 2020 में 28 सितंबर, 2019 में 9 अक्टूबर और 2018 में 19 सितंबर तक आखिरी बारिश हुई थी। जुलाई-अगस्त का रिपोर्ट कार्ड