कागजों में सरकारी मंजूरी और हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की खदान का रास्ता नहीं खुल पाया। ढाई साल से चल रहे रास्ते के विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच रविवार को भौंडा गांव में भड़ाना की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। खान विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 में ग्रामीणों ने खदान का मुख्य रास्ता खोदकर बंद कर दिया था। हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला कलेक्टर ने कमेटी बनाई। इसके बाद 30 जनवरी 2026 को राज्य सरकार ने चारागाह भूमि का वर्गीकरण बदलकर उसे सार्वजनिक रास्ता घोषित किया। रास्ते के बदले भड़ाना की पत्नी कमलेश ने ग्राम सीता में अपनी 5,250 वर्गमीटर निजी जमीन चारागाह के लिए दी। 4 मार्च को जिला कलेक्टर ने तहसीलदार वैर को आदेश की पालना कराने के निर्देश दिए, लेकिन जमीन पर विवाद खत्म नहीं हुआ। साझेदारी का विवाद भी अदालत पहुंचा खनन पट्टा संख्या 03/1993 वर्ष 1997 में स्वीकृत हुआ था। 2016 में मुकेश चंद के फर्म से रिटायर होने के बाद कमलेश भड़ाना साझेदार बनीं। इस बदलाव को लेकर विवाद हुआ। मुकेश चंद की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के मामले में हाईकोर्ट ने 20 फरवरी 2024 को सख्त कार्रवाई पर रोक लगाई थी। खान विभाग ने रास्ते के विवाद को कानून-व्यवस्था और साझेदारी विवाद को उद्योग विभाग से जुड़ा बताया। सवाल है कि रास्ता बंद होने और विवाद की जानकारी के बावजूद प्रशासन प्रभावी समाधान क्यों नहीं कर पाया।