भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा महात्मा गांधी हॉस्पिटल के ब्लड बैंक से अब निजी अस्पतालों के मरीजों को खून लेना महंगा पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन ने ‘नेट टेस्टेड ब्लड’ की दरें बढ़ा दी हैं। अब एक यूनिट के लिए मरीजों को 2250 रुपए चुकाने होंगे, जबकि पहले यह 1250 रुपए में मिल रहा था। आदेश के अनुसार पहले मरीजों से 1250 रुपए (टीटीआई टेस्ट) लिए जाते थे, लेकिन अब इसमें 1000 रुपए का अतिरिक्त नेट टेस्ट चार्ज जोड़ दिया गया है। इस तरह होल ब्लड और पीआरबीसी की एक यूनिट की कुल कीमत 2250 रुपए हो गई है। यह निर्णय राज्य सरकार, एनएचएम और राजस्थान स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल के निर्देशों के बाद लिया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ब्लड की शुद्धता और संक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नेट टेस्ट जरूरी है, इसलिए इसकी लागत मरीजों से वसूली जा रही है। यह नई दरें केवल निजी अस्पतालों के मरीजों पर लागू होंगी, जो इलाज तो प्राइवेट में करा रहे हैं लेकिन खून के लिए सरकारी ब्लड बैंक पर निर्भर हैं। एमजीएच में भर्ती मरीजों के लिए राहत बनी हुई है। अस्पताल में लगी लिस्ट के अनुसार एमजीएच के मरीजों को होल ब्लड, पीआरबीसी, आरडीपी, एफएफपी और एसडीपी जैसी सुविधाएं अब भी नि:शुल्क मिलेगी। नए आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों पर अब खून के लिए पहले से ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ेगा। अब यह रहेगी रेट लिस्ट संक्रमण रोकने के लिए नेट टेस्ट, इसलिए ब्लड महंगा नेट ( न्यूक्लिक एसीड टेस्ट) एक आधुनिक ब्लड टेस्ट है, जिससे खून में मौजूद वायरस को बहुत शुरुआती स्टेज में ही पकड़ लिया जाता है। आमतौर पर ब्लड स्क्रीनिंग में एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी जैसी बीमारियों की जांच की जाती है, लेकिन पारंपरिक टेस्ट में इन वायरस का पता चलने में कुछ समय (विंडो पीरियड) लग जाता है। यहीं नेट टेस्ट ज्यादा प्रभावी साबित होता है। यह टेस्ट सीधे वायरस के डीएनए या आरएनए को डिटेक्ट करता है, इसलिए संक्रमण का पता जल्दी चल जाता है, भले ही लक्षण न दिखें। नेट टेस्ट ऐसा एडवांस चेक है, जो खून को और ज्यादा सुरक्षित बनाता है, ताकि मरीज तक किसी तरह का संक्रमण न पहुंचे। ^आदेश के बाद इस व्यवस्था को लागू कर दिया है। अब नेट टेस्ट करने बाद ही ब्लड दे रहे है। -डॉ. अरुण गौड़, अधीक्षक, एमजीएच