डूंगरपुर| जिले में सरसों और चना की एमएसपी पर खरीदी के लिए डूंगरपुर, आसपुर और सागवाड़ा में राजफैड के संचालन में केंद्र तो खोल दिए गए, लेकिन हकीकत यह है कि दो महीने बाद भी इन केंद्रों पर एक दाना तक नहीं खरीदा गया। हालात ऐसे हैं कि सरसों में अब तक एक भी किसान का पंजीयन नहीं हुआ और चना में महज 13 किसानों का पंजीयन हुआ है, लेकिन खरीदी का आंकड़ा दोनों में शून्य है। इस पूरी विफलता की सबसे बड़ी वजह फसल की गिरदावरी सही नहीं होना है। गिरदावरी के बिना पंजीयन संभव नहीं और पंजीयन के बिना किसान केंद्र तक नहीं पहुंच सकते। प्रशासनिक सुस्ती ने पूरी व्यवस्था को ठप कर दिया है। किसानों की तैयार फसल खड़ी है। मंडियों में व्यापारी सक्रिय हैं, लेकिन सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। चना 4 हजार 694 मीट्रिक टन और सरसों 116 मीट्रिक टन हुआ उत्पादन: जिले में चना और सरसों की कुल पैदावार भी अच्छी हुई है। आंकड़ों के अनुसार चना 4 हजार 694 मीट्रिक टन और सरसों 116 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया। इसमें सबसे अधिक चना उत्पादन झौंथरीपाल ब्लॉक में 1063 मीट्रिक टन हुआ, जबकि साबला 647 मीट्रिक टन और बिछीवाड़ा में 320 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। सरसों में सीमलवाड़ा 45 मीट्रिक टन और साबला 22 मीट्रिक टन आगे रहे। इसके बावजूद खरीदी शून्य रहना व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। ब्लॉक चना सरसों डूंगरपुर 28 1 पालदेवल 39 0 दोवड़ा 81 1 गामड़ी अहाड़ा 8 1 बिछीवाड़ा 320 5 सीमलवाड़ा 185 45 चीखली 216 15 झौंथरीपाल 1063 3 सागवाड़ा 179 16 गलियाकोट 148 3 आसपुर 265 4 साबला 647 22 ओबरी 55 11 कुल 4694 116 किसानों की एक और बड़ी परेशानी केंद्रों की दूरी है। कई गांवों से केंद्र तक पहुंचने में लंबा सफर तय करना पड़ता है। इससे परिवहन खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में कम दाम पर ही पास के व्यापारियों को फसल बेचना किसानों की मजबूरी बन गई है सरकार ने इस साल सरसों का एमएसपी 6200 रुपए और चना का 5875 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन बाजार में किसानों को इससे काफी कम कीमत मिल रही है। हर क्विंटल पर सैकड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। केंद्रों पर तैनात स्टाफ खाली बैठे हैं, जबकि किसान नुकसान झेल रहे हैं। किसानों का साफ कहना है कि अगर समय पर गिरदावरी और पंजीयन होता तो अब तक हजारों क्विंटल खरीदी हो चुकी होती। हर साल की तरह इस बार भी योजनाएं कागजों में सफल और जमीन पर फेल साबित हो रही हैं। ^जिले में पैदावार नहीं होने से किसान खरीद केंद्र तक नहीं आए है। चने में अब तक मात्र 13 किसानों ने पंजीयन कराया है। सरसों में एक भी पंजीयन नहीं हुआ है। जबकि दोनों फसलों में खरीदी शून्य है। - विष्णुनारायणसिंह, राजफैड अधिकारी।