बाड़मेर और बालोतरा की ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की योजना बजट के अभाव में अटक गई है। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा 2024-25 में सिवाना के हल्देश्वर महादेव और धोरीमन्ना के धुंधलेश्वर महादेव मंदिर को ईको-टूरिज्म साइट के रूप में विकसित करना था। वित्त विभाग से बजट आवंटन में देरी हुई। आवंटन कम मिला। प्रोजेक्ट रुक गए। वन विभाग ने दोनों साइट के लिए 3.80 करोड़ रुपए की डीपीआर भेजी थी। सरकार से 109.50 लाख रुपए की ही वित्तीय स्वीकृति मिली। धुंधलेश्वर महादेव - नाले पर ब्रिज व योगा सेंटर बनेगा धोरीमन्ना की पहाड़ी पर स्थित धुंधलेश्वर महादेव मंदिर के 50 हेक्टेयर वन क्षेत्र को संरक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए फेंसिंग होनी है। अमृता देवी उद्यान का विकास होना है। इसमें चिल्ड्रन जोन शामिल है। सेल्फी जोन शामिल है। योगा सेंटर बनना है। बरसाती नाले पर ब्रिज बनना है। 2000 नए पौधों का रोपण प्रस्तावित है। स्टाफ पेट्रोलिंग के लिए नेचर ट्रेल बननी है। पर्यटकों के लिए पार्किंग बननी है। सौर लाइटें लगनी हैं। इन दोनों प्रोजेक्ट्स के पूरे होने से पर्यटन बढ़ता। पहाड़ियों में अवैध खनन पर लगाम लगती। अतिक्रमण पर लगाम लगती। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खुलते। अभी दुर्गम रास्तों और सुविधाओं की कमी के कारण यहां सावन या शिवरात्रि पर ही भीड़ जुटती है। हल्देश्वर में दुर्गादास प्रोल व बेरे का जीर्णाोद्धार होगा सिवाना से 9 किमी दूर दुर्गम पहाड़ियों में स्थित हल्देश्वर महादेव को पश्चिमी राजस्थान का मिनी माउंट कहा जाता है। प्रोजेक्ट में चिकारा, मरु लोमड़ी, नीलगाय, हाइना जैसे वन्यजीवों का संरक्षण भी शामिल है। योजना में 300 मीटर लंबी जिप लाइन का प्रस्ताव है। वॉच टॉवर का प्रस्ताव है। दुर्गादास की प्रोल व बेरे का जीर्णोद्धार होना है। 5000 पौधों का रोपण होगा। “दोनों धार्मिक स्थलों के लिए 3.80 करोड़ की डीपीआर भेजी थी। 109.50 लाख की स्वीकृति मिली है।” - सविता दहिया, डीएफओ