डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा: तकनीक से परिचित युवा जनप्रतिनिधि ई-मित्र सेवाओं, ऑनलाइन प्रमाण-पत्र, सरकारी योजनाओं और नरेगा भुगतान से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। शिक्षा और कौशल पर जोर: डिजिटल लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, बालिका शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों को पंचायत स्तर पर प्राथमिकता देने की संभावना रहती है। प्रशासन से बेहतर समन्वय: पंचायत समिति और जिला स्तर के अधिकारियों से नियमित संपर्क के जरिए विकास कार्यों की स्वीकृति, बजट और क्रियान्वयन में तेजी लाने का प्रयास किया जा सकता है। स्मार्ट गांव और पर्यावरण: सोलर स्ट्रीट लाइट, बेहतर नाली व्यवस्था, वर्षा जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग और खेल मैदान जैसे मुद्दे गांवों की विकास योजनाओं में शामिल किए जा सकते हैं। पारदर्शिता और जनभागीदारी: ग्रामसभा, सूचना साझा करने और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर ग्रामीणों को विकास कार्यों, बजट और खर्च की जानकारी दी जा सकती है। भास्कर न्यूज | प्रतापगढ़ लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव, यानी हमारी ग्राम पंचायतों में गत चुनाव में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला था। गांवों की सरकार में युवा सोच और महिला नेतृत्व की मजबूत मौजूदगी सामने आई है। जिले की 235 ग्राम पंचायतों में पुरानी कार्यशैली और पुराने ढर्रे की जगह अब नए विचारों, तकनीक, युवा ऊर्जा ने ले ली। पंचायती राज विभाग के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया तो चौंकाने वाले और उम्मीद जगाने वाले तथ्य सामने आए। पिछले पंचायत चुनाव में प्रतापगढ़ जिले की 235 ग्राम पंचायतों में से 67 में 30 वर्ष या उससे कम उम्र के जनप्रतिनिधि सरपंच चुने गए। इनमें 24 सरपंच ऐसे थे जो जेन-जी से आते है, इनकी उम्र 25 वर्ष या उससे कम थी। वहीं, 123 ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों ने नेतृत्व संभाला। यह आंकड़ा कुल पंचायतों के आधे से भी अधिक है। पंचायतीराज विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में युवा और शिक्षित जनप्रतिनिधियों की भागीदारी ने ग्रामीण नेतृत्व की नई तस्वीर पेश की। कई युवा सरपंच उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। इनमें स्नातक, बीएड और अन्य उच्च शैक्षणिक योग्यताएं रखने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। हालांकि, युवा उम्र और शिक्षा के साथ गांवों में विकास कार्यों की वास्तविक प्रगति का आकलन कामकाज के आधार पर ही किया जा सकता है। विवरण / श्रेणी संख्या / तथ्य कुल ग्राम पंचायतें-235 महिला सरपंचों की कुल भागीदारी- 123- 50% से ज्यादा 30 वर्ष तक के युवा सरपंच- 67 Gen-Z / युवा सरपंच 25 वर्ष या उससे कम- 24 उच्च शिक्षित सरपंच (स्नातक / पीजी / बीएड / बीएससी)- 15 से अधिक 20 वर्षीय सिद्धार्थ बने थे जिले के सबसे युवा सरपंच : अरनोद पंचायत समिति की अचनारा ग्राम पंचायत से 20 वर्षीय सिद्धार्थ सरपंच चुने गए थे। बीए शिक्षित सिद्धार्थ जिले के सबसे कम उम्र के सरपंचों में शामिल रहे। इसके अलावा बानघाटी, मोरवानिया, चंदौली, बोलापानी, अचलपुर और केरवास सहित कई ग्राम पंचायतों में 21 से 22 वर्ष की उम्र के जनप्रतिनिधियों ने जिम्मेदारी संभाली। जिले की 235 ग्राम पंचायतों में 123 महिला सरपंच चुनी गईं। यानी 50 प्रतिशत से अधिक पंचायतों में महिलाओं के हाथों में नेतृत्व रहा। इनमें युवा महिलाओं के साथ उच्च शिक्षित प्रतिनिधि भी शामिल हैं। मचलाना ग्राम पंचायत की 23 वर्षीय सरपंच टीना स्नातक और बीएड डिग्रीधारक हैं। काजलीखेड़ा की 40 वर्षीय सरपंच कमला भी स्नातक और बीएड शिक्षित हैं। अचलपुर की मीनाक्षी मीणा और केरवास की लक्ष्मी कुमारी दोनों 22 वर्ष की हैं और स्नातक हैं। ​भास्कर एक्सपर्ट व्यू : ग्राम पंचायतों में युवाओं और शिक्षित महिलाओं का चुनकर आना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है। जेन-जी प्रतिनिधियों की सोच पारंपरिक सरपंचों से काफी अलग है। वे योजनाओं को केवल पूरा करने के बजाय स्मार्ट और टिकाऊ बनाने पर जोर दे रहे हैं। आने वाले समय में प्रतापगढ़ की पंचायतों में पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस का नया मॉडल देखने को मिलेगा।" डॉ. संजीवन मेघवाल, विशेषज्ञ