जिले में बीती रात मौसम के बदले मिजाज ने भारी तबाही मचाई है। तेज आंधी और बारिश डिस्कॉम के लिए आफत बनकर बरसी। अंधड़ की रफ्तार इतनी भीषण थी कि जिले में करीब 120 बिजली के खंभे (पोल) उखड़ गए हैं और 15 ट्रांसफार्मर गिरकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इस प्राकृतिक आपदा के चलते जिले के करीब 50 से 60 गांवों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे हजारों की आबादी अंधेरे में डूब गई है। इससे डिस्कॉम को करीब 13-14 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। मौसम की सबसे घातक मार उच्चैन, नदबई, महंगाया, बझेरा, रारह आदि ग्रामीण इलाकों में पड़ी है। यहां आंधी की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई जगहों पर हाइटेंशन लाइन के खंभे सीधे जमीन पर आ गिरे। इन गांवों में न केवल खंभे टूटे हैं, बल्कि बारिश की वजह से ट्रांसफार्मर भी गिर गए। जैसे ही आंधी और बारिश बंद हुई बिजली निगम की तकनीकी टीमें फील्ड में उतर गईं। विभाग की पहली प्राथमिकता कस्बों और मुख्य बाजारों की बिजली बहाल करना थी, जिसमें वे काफी हद तक सफल रहे हैं। कस्बों में सप्लाई सुचारू कर दी गई है, जिससे वहां पानी की किल्लत नहीं हुई। हालांकि, असली समस्या 50-60 प्रभावित गांवों की है। यहां बिजली गुल होने से नलकूप ठप पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। साथ ही, रात के समय गांवों में अंधेरा होने से सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। मरम्मत में जुटी 15 से ज्यादा टीमें... बिजली न होने से 60 गांवों की में पानी सप्लाई ठप हो गई। लोग दूर-दराज के गांवों से पानी लाने को मजबूर हैं। अधीक्षण अभियंता रामहेत मीना के निर्देश पर टीमें मरम्मत कार्य में जुटी हैं। टूटे हुए लट्ठों (खंभों) को बदलने के लिए स्टोर से नया सामान मंगवाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही अधिकांश गांवों में सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। जिरौली और रारह जैसे इलाकों में जहां नुकसान कम है, वहां आज रात तक रोशनी लौटने की उम्मीद है।