पाली में एक युवक की रेबिज संक्रमण से मौत हो गई। रेबिज बढ़ने के बाद युवक को पानी से डर लगने लगा था। हालत ऐसी हो गई थी कि उसने पानी पीना तक बंद कर दिया था। परिजनों के अनुसार करीब दो महीने पहले युवक को एक पिल्ले ने काट लिया था, लेकिन उसने इस बारे में न तो घरवालों को बताया और न ही एंटी रेबिज वैक्सीन लगवाई। कुछ दिन बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उसे पानी से डर लगने की शिकायत होने लगी। इसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे जोधपुर रेफर कर दिया। बुधवार दोपहर 3 बजे उसकी मौत हो गई। दो महीने पहले पिल्ले ने काटा था पाली जिले के एक गांव निवासी युवक (35) सेल्समैन का काम करता था। करीब दो महीने पहले उसे एक पिल्ले ने पैर पर काट लिया था। घाव गहरा नहीं होने के कारण उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया और न ही रेबिज के टीके लगवाए। पानी देखते ही लगने लगा डर 14 जुलाई को युवक की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसे पानी से डर लगने लगा और वह पानी पी नहीं पा रहा था। इसके बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से उसे पाली के बांगड़ अस्पताल रेफर किया गया। बांगड़ अस्पताल के डॉक्टर दिनेश सीरवी ने बताया कि जांच के दौरान युवक में रेबिज के स्पष्ट लक्षण दिखाई दिए। डॉक्टरों ने उसे पानी पिलाने का प्रयास किया, लेकिन वह पानी नहीं पी सका। इसके बाद उसे जोधपुर रेफर कर दिया गया। जोधपुर पहुंचने पर डॉक्टरों ने परिजनों को युवक की गंभीर स्थिति के बारे में जानकारी दी। इसके बाद परिजन उसे वापस घर ले आए, जहां बुधवार दोपहर उसकी मौत हो गई। शाम को उसका अंतिम संस्कार किया गया। छह साल पहले हुई थी शादी मृतक की शादी करीब छह साल पहले हुई थी। उसका एक बेटा (4) भी है। अचानक हुई मौत के बाद परिवार सदमे में है। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। संपर्क में आए लोगों को भी सावधानी की सलाह बांगड़ हॉस्पिटल पाली के कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. आर.के. विश्नोई ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी को कुत्ता काट ले तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसे मामलों में तुरंत बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचकर एंटी रेबिज वैक्सीन लगवानी चाहिए, क्योंकि रेबिज का फिलहाल कोई इलाज नहीं है। डॉक्टरों ने परिजनों को सलाह दी कि युवक के संपर्क में आए लोग एहतियात के तौर पर एंटी रेबिज वैक्सीन लगवाएं और सावधानी बरतें। डॉ. विश्नोई ने कहा कि रेबिज का पता मरीज के लक्षणों के आधार पर लगाया जाता है। एक बार रेबिज की पुष्टि होने के बाद मरीज को आइसोलेशन में रखा जाता है। उन्होंने बताया कि रेबिज 100 प्रतिशत जानलेवा बीमारी है। यानी एक बार बीमारी विकसित हो जाने के बाद ऐसे मरीजों की मौत लगभग तय होती है। लक्षण दिखने के बाद बचने की संभावना बेहद कम चिकित्सकों के अनुसार रेबिज के लक्षण शरीर में विकसित होने के बाद मरीज के बचने की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है। ऐसे में किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना और एंटी रेबिज वैक्सीन लगवाना जरूरी है।