सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज और पीबीएम हॉस्पिटल में 27 करोड़ रुपए से अधिक के मैन पावर के ठेकों का मामला सीएमओ तक पहुंच गया है। एक पूर्व विधायक की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के दल को जांच के लिए भेजा है। इसकी भनक लगने के बाद पीबीएम प्रशासन में हलचल मची हुई है। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज और पीबीएम हॉस्पिटल में हुए मैन पावर के ठेकों की जांच के लिए चिकित्सा शिक्षा निदेशालय से वित्तीय सलाहकार के नेतृत्व में लेखा सेवा के अधिकारियों का चार सदस्यीय दल गुरुवार शाम को यहां पहुंचा। मेडिकल कॉलेज पहुंचकर दल के सदस्यों ने एफए पवन कस्वां से मुलाकात की। दल के सदस्यों ने वर्तमान में चल रहे मैन पावर के टेंडरों के अलावा पांच साल के टेंडरों का रिकॉर्ड मांगा है। ऐसा पहली बार हुआ है जब वित्तीय सलाहकार के दल को यहां भेजा गया है। दरअसल मैन पावर के ठेकों में शर्तों को लेकर गंभीर शिकायतें सीएमओ में की गई हैं। शिव से पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह जसोल ने सीएम को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने मेडिकल कॉलेज और पीबीएम अस्पताल में मैन पावर के टेंडरों की उच्च स्तरीय जांच कराने का आग्रह किया था। इसके अलावा पश्चिम के विधायक जेठानंद भी नर्सिंग कर्मियों की भर्ती में रुपए लेने के आरोप फर्म पर लगा चुके हैं। उन्होंने विधानसभा में भी मामला उठाया था। पांच साल के टेंडरों की ऑडिट होगी चिकित्सा शिक्षा निदेशालय से लेखा सेवा के उच्चाधिकारियों को पांच साल के टेंडरों की ऑडिट के लिए भेजा गया है। दरअसल पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह जसोल को कुछ लोगों ने परिवाद दिया, जिसमें कॉलेज और पीबीएम में मैन पावर के ठेकों को लेकर गंभीर शिकायतें की गई हैं। श्रमिकों को वेतन कम देने, पीएफ जमा नहीं कराने, 26 दिन के बजाय पूरे महीने का भुगतान उठाने और श्रमिक पूरे नहीं लगाने, चहेतों को काम देने के लिए टेंडर की शर्तें बनाने के आरोप हैं पीबीएम हॉस्पिटल में वर्तमान में करीब 27 करोड़ के मैन पावर के ठेके चल रहे हैं। वार्ड बॉय और सुरक्षा का करीब 19 करोड़ का ठेका एक ही फर्म मैसर्स पन्नाधाय के पास है। इसे लेकर पिछले दिनों काफी विवाद हो चुका है। वेतन और पीएफ के मुद्दे पर कई दिन तक आंदोलन चला था। सफाई का ठेका इस बार 70 पॉइंट बढ़ाकर कुल 420 पॉइंट का 6 करोड़ का दिया गया है। उसके बाद भी पीबीएम के वार्ड और टॉयलेट गंदगी से भरे रहते हैं। कंप्यूटर ऑपरेटर का नया ठेका ही नहीं हो रहा। वार्डों में मरीजों को गंदी बेड शीट मिलती है। लॉन्ड्री का ठेका सालों से एक ही फर्म के पास है।