मुफ्त बिजली और मोटी सब्सिडी का सपना दिखाकर शुरू की गई ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ की जमीनी रफ्तार काफी धीमी है। भारी-भरकम दावों और बजट के बावजूद अकेले अक्टूबर महीने में राजस्थान में महज 25 हजार 12 घरों पर ही सोलर रूफटॉप लगाए जा सके हैं। अक्टूबर महीने की प्रोग्रेस में राजस्थान पांचवे स्थान पर है। जबकि उत्तर प्रदेश पहले नंबर है, यहां पर इस महीने 67 हजार 359 रूफटॉप सोलर प्लांट लग चुके है। महाराष्ट्र, गुजरात व केरलम में भी सोलर प्लांट लगाने में राजस्थान से ज्यादा स्पीड है। योजना में सब्सिडी रिलीज होने में लग रहा हफ्तों का समय, वेंडर्स के स्तर पर मीटरों की किल्लत और बैंक लोन की पेचीदा प्रक्रिया के चलते आम उपभोक्ता चक्कर काटने को मजबूर हैं। नतीजतन, त्योहारी सीजन में जहां रूफटॉप इंस्टॉलेशन की रफ्तार दोगुनी होनी चाहिए थी, वहां आंकड़ा बेहद निराश करने वाला रहा। 15 दिन में सब्सिडी का दावा फेल राजस्थान में सितंबर महीने में 27 हजार 769 और अक्टूबर महीने में 25 हजार 12 सोलर प्लांट इंस्टॉल किए गए। लेकिन सितंबर में 22 हजार 777 और अक्टूबर में मात्र 13 हजार 627 उपभोक्ताओं को ही सब्सिडी जारी की गई। जबकि डिस्कॉम्स ने 29 सितंबर को दावा किया था कि रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन पूरा होने के बाद उपभोक्ताओं को पोर्टल पर अपने बैंक खाते से जुड़ी जानकारी अपडेट करनी होगी। डिस्कॉम जांच और प्रक्रिया पूरी करेगा। इसके बाद 15 दिन में पात्र उपभोक्ता के बैंक खाते में सब्सिडी की राशि सीधे भेजी जाएगी। डिस्कॉम की दलील थी कि उपभोक्ताओं के बैंक खाते की डिटेल नहीं होने की वजह से डिस्कॉम उपभोक्ताओं को सब्सिडी ट्रांसफर नहीं कर पा रहा था। योजना की इस महीने की प्रोग्रेस रफ्तार सुस्त होने की बड़ी वजहें सब्सिडी अटकने से उपभोक्ता परेशान: रूफटॉप लगाने के बाद भी सरकारी सब्सिडी के पैसे खातों में आने में 2-3 महीने लग रहे है। नेट मीटरिंग और डिस्कॉम की लेटलतीफी: बिजली कंपनियों (डिस्कॉम) की ओर से नेट-मीटर लगाने और फिजिबिलिटी रिपोर्ट अप्रूव करने में हफ्तों की देरी हो रही है। बैंक लोन की पेचीदा कागजी कार्रवाई: आसान लोन के दावों के बीच बैंकों की ओर से कागजी दस्तावेजों की लंबी मांग प्रक्रिया को अटका रही है।