भास्कर न्यूज | ब्यावर नानेश रत्नम जवाहर भवन में विनय मुनिजी के सान्निध्य में सायंकालीन प्रतिक्रमण के बाद आयोजित दो घंटे की अखंड साधना हुई। मुनिजी ने कहा कि साधना आत्मा को शिखर तक पहुंचा देती है। हर अमावस्या और पूर्णिमा को विशेष साधना करने से न केवल महापुरुषों का गुणगान होता है, बल्कि हमारे अंदर की नकारात्मक ऊर्जा पूरी तरह बाहर निकल जाती है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे संचित कर्मों की निर्जरा होती है। साधना सत्र की शुरूआत भक्तिभाव के साथ भक्तामर स्रोत के सामूहिक पाठ से हुई। इसके बाद क्रमबद्ध तरीके से आध्यात्मिक अनुष्ठान आगे बढ़ा। इसमें श्रावकों ने एकाग्रचित्त होकर 27 लोग्गस का पाठ किया। चिंतामणि पार्श्वनाथ स्रोत, उवसग्गहरं स्रोत, 13 णमोत्थुणं और पैसठियां छंद का सामूहिक वाचन किया गया। साथ ही इक्षु रस से किया पारणा... आखा तीज महान, जय-जय आदिनाथ भगवान... जैसे भजन प्रस्तुत किए।