प्रतापगढ़ के धमोतर थाना क्षेत्र में बालश्रम और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रशासन, पुलिस और गायत्री सेवा संस्थान ने तीन नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया। ये बच्चे भेड़ चराते मिले थे और राजसमंद, सिरोही व चित्तौड़गढ़ जिलों के रहने वाले हैं। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फील्ड विजिट के दौरान भेड़ चराते दिखे बच्चे, हुआ शक गायत्री सेवा संस्थान के जिला समन्वयक रामचन्द्र मेघवाल फील्ड विजिट पर थे। उन्होंने रास्ते में भेड़ों के तीन अलग-अलग झुंड देखे, जिनकी देखरेख छोटे बच्चे कर रहे थे। इस पर उन्हें शक हुआ और उन्होंने तुरंत पुलिस को जानकारी दी। पूछताछ में सामने आया कि बच्चों को कथित तौर पर एडवांस पैसे देकर काम पर लगाया गया था। आरोप है कि इन बच्चों को राज्य से बाहर ले जाकर मजदूरी कराने की योजना थी। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। बाल कल्याण पुलिस अधिकारी रेखा माली ने बच्चों के बयान दर्ज किए। इसके बाद बच्चों को बाल कल्याण समिति प्रतापगढ़ के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें शेल्टर होम में रखा गया। प्रशासन ने तीनों बच्चों को बंधुआ मुक्ति प्रमाण पत्र भी जारी किए हैं। एक साल पहले भी आया था ऐसा ही मामला करीब एक साल पहले भी ऐसा ही मामला सामने आया था। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गायत्री सेवा संस्थान ने श्रम विभाग के साथ मिलकर तीन बच्चों को गड़रियों के यहां से मुक्त कराया था। उस समय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राजस्थान बाल आयोग ने भी मामले को गंभीरता से लिया था। इसके बाद जनजाति क्षेत्र से बच्चों को मजदूरी के लिए ले जाने की शिकायतें कम हो गई थीं। संस्थान के मुताबिक, अब एक साल बाद फिर से इसी तरह का मामला सामने आया है।