भास्कर संवाददाता | चूरू प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने व मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए सभी गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य मानकों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए 15 जुलाई से 5 दिवसीय अभियान चलेगा। अभियान में गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व स्वास्थ्य संबंधी जांचों का रिकॉर्ड एकत्र कर उनके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी रखी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने मंगलवार को इस संबंध में वीसी के माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फील्ड में कार्यरत आशा वर्कर, एएनएम व सीएचओ के माध्यम से स्क्रीनिंग का काम गंभीरता करवाएं। हर गर्भवती महिला का गर्भधारण के प्रथम 12 सप्ताह के भीतर पंजीकरण सुनिश्चित करें। सभी सूचनाएं पीसीटीएस पोर्टल पर दर्ज करें। जिले में मातृ मृत्यु की हर घटना का 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक विश्लेषण तथा नियमानुसार मैटरनल डेथ रिव्यू कराने, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और मातृ मृत्यु की साप्ताहिक समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं, रक्त की उपलब्धता, प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थियेटर तथा नवजात पुनर्जीवन उपकरणों को पूरी तरह से चालू स्थिति में रखा जाए। ^गर्भवती महिलाओं की सघन स्क्रीनिंग को लेकर प्रमुख शासन सचिव की तरफ से वीसी के माध्यम से निर्देश दिए गए हैं। निर्देशों की पालना करवाएंगे। इसके लिए 15 जुलाई से अभियान चलाया जाएगा। -डॉ. शशांक चौधरी, आरसीएचओ, चूरू शासन सचिव ने निर्देश दिए हैं कि हर गर्भवती महिला की कम से कम चार गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए। जांच के दौरान रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, वजन, मूत्र परीक्षण, रक्त शर्करा तथा अन्य आवश्यक जांच करें। उनका रिकॉर्ड भी नियमित रूप से अपडेट रखें। सभी जिलों को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान करने के लिए उनका अलग ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, पूर्व सिजेरियन, जुड़वां गर्भ, अत्यधिक रक्तस्राव तथा अन्य जटिलताओं वाले मामलों को नियमित फॉलोअप करें।