टोंक जिले के प्राइवेट स्कूल संचालकों ने सोमवार को RTE जांच विभागीय टाइम फ्रेम के खिलाफ किए जाने का विरोध किया। संचालकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन भी दिया। ज्ञापन में स्कूल शिक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव के लेटर का हवाला देते हुए विरोध किया। स्कूल शिक्षा परिवार टोंक ने ज्ञापन में लिखा- विभाग की ओर से हर साल आरटीई में प्रवेश लेने वाले सभी नए सत्र और पूर्व सत्र के विद्यार्थियों का भौतिक सत्यापन विभाग कराया जाता है। यह सत्यापन विश्वसनीय राजपत्रित अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। कई दस्तावेज से किया जाता है सत्यापन इसमें विद्यार्थी के जाति प्रमाण, पत्र आय प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र ,प्रवेश आवेदन पत्र ,निवास प्रमाण पत्र सहित सभी दस्तावेजों का गहनता पूर्वक निरीक्षण करने के बाद उन्हें वेरीफाइ किया जाता है। आरटीई में प्रवेशित विद्यार्थियों का सत्यापन आधार कार्ड व जन आधार कार्ड द्वारा भी किया जाता है। इसके लिए विभाग की ओर से बनाए गए पोर्टल से आधार नंबर व जन आधार नंबर को सत्यापित किया जाता है। इसके बाद भी शिक्षा विभाग अपने विश्वसनीयता के लिए प्रतिवर्ष 20 प्रतिशत पुनर्निरीक्षण करवाता है। विभाग के कर्मचारी की ओर से किए गए निरीक्षण की पुष्टि करता है। लेकिन बार -बार निरीक्षण करवाने से विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि दुबारा जांच का कोई औचित्य नहीं है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। अवैध कोचिंग संस्थान पर कार्रवाई की मांग ज्ञापन में विद्यालय समय में अवैध रूप से संचालित कोचिंग संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही कुछेक विद्यालयों की ओर से शिक्षा विभाग की निर्धारित मान्यता शर्तों एवं स्वीकृत स्थान के विरुद्ध विद्यालयों का संचालन करके विद्यार्थियों को गुमराह करके उनको प्रवेश देने और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किए जाने की शिकायत भी कलक्टर से की है। ज्ञापन में लिखा है कि जिले में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत अनेक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। गत शैक्षणिक सत्रों से आरटीई अंतर्गत प्रवेशित विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान लंबित है। कई वार संबंधित विभाग को अवगत कराने के बावजूद अब तक भुगतान नहीं हो पाया है, जिससे विद्यालयों को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण विद्यालयो की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। संचालकों ने मांग की है कि आरटीई अंतर्गत विद्यार्थियों के सभी लंबित बिलों का शीघ्र निस्तारण करके भुगतान करवाया जाए। ज्ञापन देने वालों में,संयोजक विशाल श्रीवास्तव ,मालचंद शर्मा सहित निजी शिक्षण संस्थानों के संचालक शामिल थे।