झालावाड़| पनवाड़ कस्बे में 7 साल पहले प्रियंका गोस्वामी मौत मामले में झालावाड़ एनडीपीएस कोर्ट विशिष्ट न्यायाधीश ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। जबकि मौके पर उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार कोर्ट ने आत्महत्या के बजाय ​हत्या की आशंका जताई है। मामला 25 मार्च 2019 का है। फरियादी रामकल्याण गोस्वामी ने पनवाड़ पुलिस थाना में रिपोर्ट दी कि उसकी बेटी प्रियंका गोस्वामी ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह कक्षा 12वीं की छात्रा थी। घटना के समय वह बच्चों को स्कूल छोड़ने गया था, जबकि उसकी पत्नी खेत पर सरसों काटने गई हुई थी। दोपहर करीब 3:30 बजे स्कूल संचालक कुंज बिहारी वैष्णव ने फोन कर प्रियंका के साथ अनहोनी होने की सूचना दी। घर पहुंचने पर प्रियंका फंदे से लटकी मिली। पिता ने आरोप लगाया था कि लायफल निवासी आलोक पुत्र शिवप्रसाद द्वारा परेशान किए जाने से तंग आकर प्रियंका ने आत्महत्या की। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। तीसरे व्यक्ति पर हत्या की संभावना जताई सुनवाई के दौरान अदालत ने कई परिस्थितियों पर संदेह जताया। जिस कमरे में प्रियंका फंदे से लटकी मिली, उसका दरवाजा बाहर से बंद था और उसके पैर घुटनों तक जमीन पर टिके हुए थे। साथ ही जिस दुपट्टे से वह लटकी मिली, वह पुराना और कई जगह से फटा हुआ था। अदालत ने माना कि इन परिस्थितियों से आत्महत्या की कहानी संदिग्ध प्रतीत होती है। किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा हत्या कर घटना को आत्महत्या का रूप देने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह जानकारी अभियुक्त के अधिवक्ता ओंकारेश्वरम शर्मा ने बताया कि साक्ष्य के अभाव में अदालत ने आलोक को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।