दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन के चलते पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के साथ होने वाली मीटिंग टल गई है। वहीं बागी गुट के नेता पूर्व CM व सांसद चरणजीत चन्नी का एक वीडियो वायरल हुआ है। यह वीडियो नई दिल्ली में संसद परिसर का है। वीडियो में दिख रहा है कि कांग्रेस के सीनियर नेताओं की तरफ से चन्नी को पूरी तरह इग्नोर किया गया है। वीडियो में राहुल गांधी प्रियंका गांधी से बात कर रहे हैं। उनके साथ पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद हैं। इसी दौरान चरणजीत चन्नी आते हैं लेकिन वह राहुल गांधी के पास नहीं आते। वह पीछे की तरफ मंडराते रहते हैं। फिर आखिर में अमृतसर से सांसद गुरजीत औजला के साथ खड़े हो जाते हैं। हालांकि इस दौरान राहुल गांधी व प्रियंका गांधी चन्नी की तरफ देखते तक नहीं हैं। आखिर में चन्नी सांसद औजला के साथ बात करने लगते हैं। माना जा रहा है कि ये वीडियो सोमवार, 20 जुलाई को मानसून सेशन के पहले दिन का है, लेकिन इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। पार्टी ने इन नेताओं को दिल्ली बुलाया था पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने दिल्ली में इंदिरा भवन में सीनियर नेताओं की मीटिंग बुलाई थी। जिसमें प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व CM व सांसद चरणजीत चन्नी, नेता विपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सुखजिंदर रंधावा को बुलाया गया था। खास बात थी कि अगर मीटिंग होती तो, पंजाब कांग्रेस में चुनाव से पहले चन्नी और वड़िंग की गुटबाजी के बीच यह पहली बार होता, जब दोनों नेता एक ही जगह आमने-सामने बैठे होते। कांग्रेस हाईकमान पहले ही साफ कर चुका है कि राजा वड़िंग को प्रधान पद से नहीं हटाया जाएगा। ऐसे में संगठन की जिम्मेदारी उनके पास ही रह सकती है। बागी चन्नी गुट को भी हाईकमान टिकट वितरण में भूमिका और बहुमत मिलने की सूरत में चरणजीत चन्नी के नाम पर सीएम चेहरे के तौर पर विचार करने का भरोसा देकर खुश कर सकता है। कांग्रेस हाईकमान की मीटिंग अहम क्यों थी…. 1. चुनाव में कांग्रेस का 'रीयल बॉस' कौन?
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी और हाईकमान चुनाव से पहले संगठन में कोई बड़ा बदलाव नहीं चाहते। ऐसे में प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के पास ही संगठन की कमान रहेगी। चुनावी अभियान, संगठन और कमेटियों के बीच तालमेल की जिम्मेदारी भी उनके पास रहने के संकेत हैं। यानी चुनाव तक पार्टी की ओवरऑल कमांड वड़िंग के हाथ में रह सकती है। 2. चन्नी को कैसे मनाएगा हाईकमान?
वड़िंग को संगठन की कमान मिलने की स्थिति में हाईकमान चन्नी गुट को साधने की कोशिश करेगा। सूत्रों के मुताबिक टिकट वितरण में चरणजीत सिंह चन्नी की भूमिका बढ़ाई जा सकती है। साथ ही बहुमत मिलने की स्थिति में मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर उनके नाम पर विचार का भरोसा भी दिया जा सकता है, ताकि दोनों गुटों के बीच राजनीतिक संतुलन बना रहे। 4. CM चेहरा अभी क्यों नहीं?
मुख्यमंत्री चेहरे की बहस चुनाव के बाद या उचित समय पर होगी। अभी सभी नेताओं को अपनी-अपनी जिम्मेदारियों पर फोकस करने और सार्वजनिक बयानबाजी से बचने को कहा जाएगा। हाईकमान का मानना है कि अभी CM चेहरे का ऐलान करने से संगठन से ज्यादा व्यक्तियों की चर्चा शुरू हो जाएगी। इसलिए फिलहाल पूरा फोकस चुनावी तैयारी पर रहेगा। 5. आखिरी चेतावनी- नहीं माने तो एक्शन
हाईकमान नेताओं को साफ संदेश दे सकता था कि चुनाव से पहले अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। अगर बैठक के बाद भी सार्वजनिक बयानबाजी, गुटबाजी या नेतृत्व पर सवाल उठे तो संबंधित नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। कांग्रेस चुनाव से पहले 'वन कमांड, वन मैसेज' की रणनीति पर आगे बढ़ना चाहती है। 6. आखिर कांग्रेस का पूरा गेम प्लान क्या है?
हाईकमान की रणनीति संगठन और चुनावी राजनीति के बीच संतुलन बनाने की है। संगठन की कमान राजा वड़िंग के पास रखने के साथ चन्नी को टिकट वितरण और भविष्य के नेतृत्व में अहम हिस्सेदारी देकर दोनों गुटों को साथ रखने की कोशिश होगी। मकसद साफ है- चुनाव से पहले नेतृत्व की लड़ाई खत्म कर पूरी पार्टी को एक कमांड के तहत मैदान में उतारना है, यानी हाईकमान का फॉर्मूला साफ है—'कमान एक के हाथ, सम्मान सभी के साथ।' ************ ये खबर भी पढ़ें: कांग्रेस हाईकमान पंजाब प्रधान बदलने को राजी था: सिंगला पर चन्नी भी सहमत थे, अचानक वड़िंग की वापसी क्यों; चन्नी ने मीटिंग में क्या कहा पंजाब कांग्रेस में टूट के खतरे के बीच नए खुलासे सामने आए हैं। कांग्रेस हाईकमान पूर्व सांसद विजयइंदर सिंगला को प्रधान बनाने वाला था। चन्नी को कैंपेन कमेटी का प्रमुख बनाना था। खुद चन्नी भी इसके लिए राजी थे। इसकी वजह ये थी कि विजयइंदर सिंगला हिंदू नेता हैं और पंजाब सिख स्टेट होने के नाते पहले भी कांग्रेस सुनील जाखड़ को सीएम बनाने से इनकार कर चुकी है। ऐसी सूरत में चन्नी ही सबसे बड़े दावेदार होते। (पढ़ें पूरी खबर)