पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने ISKCON की तरफ से अलग तिथियों पर जगन्नाथ रथयात्रा और स्नान यात्रा निकालने पर आपत्ति जताई है। दिव्यसिंह देव ने 8 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी को लेटर लिखा है और हस्तक्षेप की मांग की है। दिव्यसिंह ने कहा कि इससे प्राचीन परंपरा खत्म हो जाएगी। गजपति महाराज दिव्यसिंह देब श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के अध्यक्ष हैं। उनका कहना है कि ISKCON रथयात्रा का आयोजन ऐसी तारीखों पर कर रहा है, जो शास्त्रों के अनुसार नहीं हैं। इससे भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं। ISKCON ने विदेशों में पहले मनाया उत्सव रथयात्रा को लेकर विवाद नया नहीं है। 2024 और 2025 में भी पुरी के गजपति महाराजा ने ISKCON से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी पुरी के धार्मिक पंचांग के अनुसार रथयात्रा आयोजित की जाए। 2026 में यह विवाद इसलिए ज्यादा चर्चा में आया क्योंकि कई देशों में रथयात्रा पुरी की तिथि से कई हफ्ते पहले आयोजित की गई, जिसके बाद औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई गई थी। मध्य प्रदेश में प्रस्तावित रथयात्राओं पर भी आपत्ति गजपति महाराज ने उज्जैन स्थित ISKCON मंदिर की ओर से 16 से 25 जुलाई के बीच मध्य प्रदेश के 66 स्थानों पर रथयात्रा आयोजित करने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रथ यात्रा केवल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाला 9 दिवसीय उत्सव है। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास रचित स्कंद पुराण में भी भगवान जगन्नाथ ने स्वयं स्नान यात्रा और रथयात्रा की निर्धारित तिथि बताई हैं। ऐसे में मनमानी तिथियों पर आयोजित करना प्राचीन परंपराओं और शास्त्रों के विपरीत है। महाराज देव के पूर्वजों ने किया था मंदिर का पुनर्निर्माण वर्तमान गजपति महाराज दिव्यसिंह देव भोई वंश से हैं। यह वंश भगवान जगन्नाथ की परंपरा के संरक्षक के रूप में भी जाना जाता है। माना जाता है कि उन्होंने अफगान आक्रमणों के बाद पुरी में भगवान जगन्नाथ की पूजा-परंपरा को फिर से व्यवस्थित किया था और मंदिर की धार्मिक व्यवस्था को पुनर्स्थापित किया। परंपरा के अनुसार, वे भगवान जगन्नाथ के प्रमुख सेवक माने जाते हैं। रथ यात्रा के दौरान रथों पर सोने की झाड़ू से बुहारने की पवित्र सेवा (जिसे 'छेरा पंहरा' कहा जाता है) करते हैं। 1970 में मात्र 17 साल की आयु में उनका राज्याभिषेक हुआ था। कानून की उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले महाराज देव श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के स्थायी अध्यक्ष भी हैं। -------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पुरी रथयात्रा: 200 से ज्यादा लोग 58 दिनों में तैयार करते हैं रथ, जानिए यात्रा के बाद इन रथों का क्या होता है हर साल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के 45 फीट ऊंचे तीनों रथ 200 से ज्यादा लोग सिर्फ 58 दिनों में तैयार करते हैं। ये रथ 5 तरह की खास लकड़ियों से पूरी तरह हाथों से बनाए जाते हैं। शुरुआत अक्षय तृतीया से हो जाती है और गुंडिचा यात्रा के दो दिन पहले रथ बन कर तैयार हो जाते हैं। यात्रा खत्म होने के बाद रथों को तोड़ दिया जाता है। पढ़ें पूरी खबर…