अमावस्या के अवसर पर तीर्थराज पुष्कर में आस्था, संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन की महिला इकाई द्वारा यहां ऐतिहासिक ‘पगड़ी महोत्सव’ का आयोजन किया गया। इस खास आयोजन में पुष्कर के 52 घाटों के चारों ओर करीब 1800 मीटर लंबी पगड़ी अर्पित की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्ति और उत्साह से सराबोर हो गया। अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिला महामंत्री उमेश गर्ग ने बताया- यह आयोजन लंबे समय से संजोया गया सपना था, जो अब साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि महिला इकाई ने श्री पुष्कर राज जी को पगड़ी अर्पित करने की परंपरा को इस बार भव्य रूप दिया है। इस आयोजन को लेकर पिछले तीन वर्षों से तैयारियां की जा रही थीं। देखिए पगड़ी महोत्सव की तस्वीरें- 350 से अधिक महिलाओं ने अर्पित की पगड़ी इस धार्मिक अनुष्ठान में अजमेर, जयपुर, मकराना और किशनगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से 350 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में आचार्य की भूमिका निभा रहे पंडित रविकांत शर्मा ने बताया कि वर्षा फतेहपुरिया के नेतृत्व में इस आयोजन को सफल बनाया गया। उन्होंने कहा कि 52 घाटों के चारों ओर पगड़ी अर्पित करना श्रद्धा और वस्त्रालंकार की विशेष परंपरा का प्रतीक है। पूजन, महाआरती के साथ हुआ लाइव संकीर्तन कार्यक्रम के दौरान विशेष पूजन, अभिषेक, आरती और महाआरती का आयोजन किया गया। भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। इस बार पहली बार लाइव संकीर्तन का आयोजन भी किया गया, जो कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बना। रूसी पर्यटक भी हुईं भारतीय संस्कृति से प्रभावित इस आयोजन की खास बात यह रही कि सात समुंदर पार से आई रूसी पर्यटक वोल्गा भी इस परंपरा से प्रभावित नजर आईं। उन्होंने कहा कि यह उत्सव उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा। उनके अनुसार, पुष्कर सरोवर भगवान ब्रह्मा का प्रतीक है और महिलाएं उनके सम्मान में पगड़ी अर्पित कर रही हैं। वोल्गा ने बताया कि यहां महिलाएं लाल साड़ी पहनकर पारंपरिक तरीके से आयोजन में शामिल हुईं, जो शक्ति और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी में इस पगड़ी को ‘साफा’ कहा जाता है, जबकि रूसी भाषा में इसे ‘शापका’ कहा जाता है। उन्होंने खुद भी लाल रंग धारण कर इस सांस्कृतिक अनुभव को अपनाया।