मानदेय 25 हजार रुपए करने और रिटायरमेंट पर 10 लाख रुपए देने की मांग को लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लगा महिला कार्यकर्ता गुरुवार सुबह अलवर में रोड पर उतर गई। वहीं आशा सहयोगिनी भी राज्य कर्मचारी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए मिनी सचिवालय पहुंची तो एक सहयोगिनी गर्मी के कारण बेहोश हो गई। तब अन्य कार्यकर्ताओं ने सरकार को कोसते हुए कहा कि आशा सहयोगिनी के कारण सरकारी कार्यक्रम आगे बढ़ते हैं। अब टीकाकरण का काम ठप हो गया है। वहीं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मोती डूंगरी से मिनी सचिवालय तक रैली निकाली। उसके बाद अधिकारियों को सरकार के नाम ज्ञापन दिया। कार्यकर्ताओं ने कहाकि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी तब तक वे आंगनबाड़ी केंद्रों को नहीं खोलेंगी। चाहे नोटिस मिले या नौकरी से हटाया जाए। वहीं आशा सहयोगिनी का कहना है कि एक महीने से आंदोलन कर रही है। हमारे काम पर नहीं जाने से टीकाकरण भी नहीं हो रहा है। सहयोगिनी संगठन की अध्यक्ष भी गर्मी के चलते बेहोश हो गई। काम स्थायी कर्मचारियों जैसा, दाम बेहद कम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की प्रतिनिधि लतेश कुमारी का कहना है कि कार्यकर्ता लंबे समय से बेहद कम मानदेय पर काम कर रही हैं। उनसे विभाग की सभी महत्वपूर्ण योजनाओं का जिम्मा स्थायी कर्मचारियों की तरह संभलवाया जाता है, लेकिन बदले में उचित पारिश्रमिक नहीं मिलता। इससे पहले 5 जून को प्रस्तावित सांकेतिक धरने के दौरान अधिकारियों ने बकाया मानदेय भुगतान और अन्य मांगों को सरकार के सामने रखकर समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस कारण अब ताले जड़कर विरोध में उतरे हैं। तालाबंदी की चेतावनी, सरकार की होगी जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यदि हड़ताल और तालाबंदी के कारण विभागीय कार्य या आमजन की सेवाएं प्रभावित होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग और राज्य सरकार की होगी।