आदिवासी समुदाय के महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर राजस्थान में 1 से 15 नवंबर तक जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा। इस दौरान राजकीय और गैर-राजकीय विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों तथा छात्रावासों में विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने इस संबंध में सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों को निर्देश जारी कर कार्यक्रमों का सफल आयोजन सुनिश्चित करने को कहा है। निर्देशों के अनुसार, विद्यार्थियों को जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, आदिवासी संस्कृति, कला, परंपराओं, पारंपरिक ज्ञान और पर्यावरण संरक्षण में जनजातीय समुदायों के योगदान से परिचित कराया जाएगा। 15 नवंबर को शिक्षण संस्थानों और छात्रावासों में भगवान बिरसा मुंडा सहित अन्य आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। प्रतियोगिताओं से निखरेगी विद्यार्थियों की प्रतिभा जनजातीय गौरव दिवस के दौरान पेंटिंग, कहानी लेखन, कविता, निबंध, फोटोग्राफी, पारंपरिक कला एवं शिल्प, लोकसंगीत, जनजातीय नृत्य, नाटक, नुक्कड़ नाटक और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकेंगी। प्रतियोगिताओं के लिए ‘मेरा कबीला, मेरी विरासत’, ‘भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय योगदान’ और ‘अपनी जनजाति को जाने, अपनी विरासत को जाने’ जैसे विषय निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ ही जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों, इतिहास, भाषाओं और पारंपरिक विरासत पर 250 से 300 शब्दों के संक्षिप्त लेख लिखने के लिए भी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। कार्यशालाओं और सामुदायिक गतिविधियों पर जोर कार्यक्रम के तहत विद्यालयों में जनजातीय संस्कृति, नृत्य, संगीत और शिल्प पर आधारित कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। उत्कृष्ट जनजातीय प्रतिभाओं को सम्मानित करने के साथ विद्यार्थियों को स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और सामुदायिक गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा। शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से जनजातीय विरासत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। जनजातीय नायकों के योगदान से प्रेरणा लेंगे विद्यार्थी शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा), राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस विद्यार्थियों को भगवान बिरसा मुंडा सहित आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति योगदान से परिचित कराने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में इन आयोजनों को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी में जनजातीय विरासत के प्रति सम्मान, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय गौरव की भावना विकसित की जा सकती है। गतिविधियों की रिपोर्ट पोर्टल पर करनी होगी अपलोड शिक्षा निदेशालय ने निर्देश दिए हैं कि आयोजित गतिविधियों के फोटोग्राफ, वीडियो और संक्षिप्त विवरण निर्धारित जनजातीय कार्य मंत्रालय के पोर्टल पर अपलोड किए जाएं। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों की पालना सर्वोच्च प्राथमिकता से सुनिश्चित करने को कहा गया है।