पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने स्थानीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव समय पर नहीं करवाने के मामले में राष्ट्रपति और राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की है। गहलोत ने कहा- राजस्थान की बीजेपी सरकार जानबूझकर पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनाव नहीं करवा रही है। यह अंबेडकर के उसूलों के खिलाफ है,संवैधनिक संकट से कम नहीं है। इसमें राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों को हस्तक्षेप करना चाहिए था। गहलोत जयपुर में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। आज पंचायत चुनाव नहीं करवा रहे, नगर निकाय चुनाव नहीं करवा रहे, ये तो अंबेडकर साहब के संविधान का पार्ट है। अगर उनमें विश्वास होता तो आज पंचायत चुनाव भी होते, नगर निकायों के चुनाव भी होते और तो और को-ऑपरेटिव के चुनाव भी होते, जो करीब 10 साल से नहीं हो रहे हैं। ये संस्थाओं को बर्बाद क्यों कर रहे हैं? गहलोत ने कहा- ये तमाम जो संस्थाएं हैं,इनको बर्बाद क्यों कर रहे हैं? जब सुप्रीम कोर्ट कह चुका, हाईकोर्ट कह चुका है, चुनाव आपको करवाने पड़ेंगे, अप्रैल की तारीख तक दे दी। तब भी नहीं करवाए। ये तो संविधान का ही ब्रेकडाउन टाइप है। सत्ता में बैठे लोगों की कथनी करनी में अंतर बाबा साहेब अंबेडकर का संविधान निर्माण में जो योगदान है वो तो इतिहास में दर्ज हो गया है। अब जो लोग अंबेडकर के उसूलों में विश्वास नहीं करते थे, वो आज सत्ता में हैं और उनकी जयंती मना रहे हैं। उनका संविधान में विश्वास नहीं हैं। संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं। राहुल गांधी रोज कहते हैं, संविधान बचाओ, वो क्यों कहते हैं? क्योंकि संविधान की धज्जियां उड़ रही हैं, लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। आज जो कुछ देश में हालात बन गए हैं, ज्यूडिशियरी में भी, एजेंसियों में भी, पूरे देश में बहुत बड़ी स्थिति अजीब बन गई है। फिर भी 14 अप्रैल को अम्बेडकर साहब की जयंती सब मनाते हैं, मनाएंगे भी। उनकी कथनी और करनी में अंतर है। --- ये खबर भी पढ़िए- पंचायत-निकाय चुनाव टलवाने के लिए हाईकोर्ट पहुंची सरकार:गिनाईं हर महीने की परिस्थितियां, कहा- दिसंबर तक चुनाव कराना संभव नहीं राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव टलवाने के लिए सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है (पढ़िए पूरी खबर)