प्रदेश में बस अग्निकांड की बढ़ती घटनाओं और प्रशासन की सुस्ती के बाद जजेज एक बार फिर फील्ड में उतरकर बसों की जांच करेंगे। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने प्रदेश की निजी और सरकारी बसों की जांच को लेकर एक महीने का अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत जयपुर सहित प्रदेश के प्रमुख 12 शहरों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव (जज) बसों की जांच करेंगे। यह अभियान मंगलवार से शुरू हुआ। इसके पहले चरण में जजेज लंबी दूरी की लग्जरी बसों की जांच करेंगे। जांच के दौरान बसों में नियमों की अनदेखी मिलने पर बसों के चालान और जब्ती की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा। इस दौरान जजेज के साथ परिवहन अधिकारियों की टीम भी मौजूद रहेगी। दौसा बस हादसे के बाद निर्णय अभियान को लेकर सोमवार को रालसा के सदस्य सचिव हरिओम अत्री ने अभियान में शामिल जिलों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिवों के साथ चर्चा हुई थी। अत्री ने कहा- सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश के फलौदी सड़क हादसे को लेकर दर्ज याचिका में विस्तृत दिशा-निर्देश दे रखे हैं। वहीं हाल ही दौसा जिले में बस हादसा हुआ। ऐसे में प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष और हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने मामले में गंभीरता दिखाई और उनके निर्देश पर अभियान शुरू किया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि कोई बस नियम के खिलाफ चलती मिली तो मौके पर बस को जब्त करवाया जाए। उसकी सवारियों को मुआवजा दिलाने के लिए स्थायी लोक अदालत में केस दायर करवाने के लिए सवारियों को जागरूक करके कागजी प्रक्रिया पूरी करवाई जाए। एसओजी में भी मामला दर्ज इस दौरान वीसी से जुडे़ न्यायिक अधिकारी नवीन किलानया ने कहा- नगालैंड और आसपास के राज्यों में पंजीकृत बसें राज्य में चल रही हैं। इसे लेकर एसओजी में भी मामला दर्ज है। इस पर राज्य प्राधिकरण के सदस्य सचिव अत्री ने कहा कि एसओजी में कार्रवाई नहीं हो रही है तो उसे भी गंभीरता से देखा जाएगा। उन्होंने जिला प्राधिकरणों के सचिवों से कहा कि यदि लोक परिवहन (निजी) की बसों में भी नियमों की पालना नहीं हो रही है तो अभियान के दूसरे चरण में उनकी भी जांच की जाए।