चित्तौड़गढ़ शहर को जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। कपासन चौराहे से मानपुरा तक करीब ढाई किलोमीटर लंबी नई बायपास सड़क बनाई जाएगी, जिसके साथ दो बड़ी पुलिया का निर्माण भी किया जाएगा। इस सड़क के बनने से शहर के अंदर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और लोगों की आवाजाही अधिक आसान हो जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का वर्क ऑर्डर लगभग 7 दिनों में जारी कर दिया जाएगा, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। लंबे समय से इस मार्ग पर ट्रैफिक की समस्या बनी हुई थी, जिसे देखते हुए यह परियोजना काफी अहम मानी जा रही है। बजट घोषणा के बाद तेज हुई प्रक्रिया इस सड़क परियोजना की घोषणा राजस्थान सरकार ने वर्ष 2024-25 के बजट में की थी। अब इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सड़क और पुलिया निर्माण के लिए 36 करोड़ 63 लाख 48 हजार 407 रुपए का टेंडर जारी किया गया है। PWD के अधिशाषी अभियंता नवीन कुमार अग्रवाल के अनुसार शेष राशि जमीन अधिग्रहण और अन्य आवश्यक कार्यों में खर्च की जाएगी। कुल परियोजना लागत लगभग 63 करोड़ 50 लाख रुपए रहेगी। यह सड़क शहर के बाहरी हिस्सों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ट्रैफिक को सुगम बनाएगी। कपासन चौराहा बना सबसे व्यस्त जंक्शन कपासन चौराहा चित्तौड़गढ़ शहर का सबसे व्यस्त क्षेत्र माना जाता है, जहां दिनभर भारी वाहनों और आम यातायात का दबाव रहता है। कई बार यहां जाम की स्थिति भी बन जाती है। मानपुरा, गोपालपुरा, भीलवाड़ा-कोटा हाईवे और आसपास के क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को अभी शहर के अंदर से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे समय अधिक लगता है और परेशानी बढ़ती है। बायपास सड़क बनने के बाद वाहन सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे और शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव काफी कम हो जाएगा। आधुनिक डिजाइन के साथ बनेगी सड़क इस बायपास सड़क को आधुनिक तकनीक के अनुसार तैयार किया जाएगा। सड़क का मुख्य कैरिज वे 7 मीटर चौड़ा होगा, जबकि दोनों ओर 1.5-1.5 मीटर के पेयर्ड शोल्डर बनाए जाएंगे। इनका उपयोग पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहनों के लिए किया जाएगा। इस तरह कुल सड़क की चौड़ाई लगभग 10 मीटर होगी, जिससे यातायात सुरक्षित और सुगम रहेगा। बढ़ते ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए इसका डिजाइन तैयार किया गया है। दो बड़ी पुलिया भी होंगी शामिल इस परियोजना में दो नदियों पर पुलिया निर्माण भी शामिल है। बेड़च नदी पर करीब 270 मीटर और गम्भीरी नदी पर लगभग 210 मीटर लंबी पुलिया बनाई जाएगी। इन पुलियों के बनने से बारिश के मौसम में भी आवागमन बाधित नहीं होगा और पानी का प्रवाह सुचारू रूप से बना रहेगा। जमीन अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया इस परियोजना के लिए करीब साढ़े 7 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी, जिसमें लगभग साढ़े 4 हेक्टेयर निजी खातेदारी की जमीन शामिल है। जिन किसानों और भूमि मालिकों की जमीन इस प्रोजेक्ट में आएगी, उन्हें सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाएगा। अनुमान है कि कुल मुआवजा राशि 14 से 15 करोड़ रुपए तक हो सकती है। डेढ़ से दो साल में पूरा होगा निर्माण कार्य इस परियोजना का निर्माण कार्य बांसवाड़ा की भारती कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया है। वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद कंपनी जल्द काम शुरू करेगी। पूरा प्रोजेक्ट करीब डेढ़ से दो साल में पूरा होने की संभावना है। हालांकि विभाग का प्रयास रहेगा कि काम तय समय से पहले पूरा कर लोगों को जल्द राहत दी जा सके।