लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं होने पर रविवार को CM भजनलाल शर्मा ने कहा- विपक्ष ने अपनी ओछी राजनीति के चलते महिलाओं के सपनों पर पानी फेर दिया। यह परिवारवाद वाली पार्टियां हैं। इनके मन में कहीं ना कहीं भय था कि महिलाएं कहीं इनसे आगे नहीं निकल जाएं। इन्होंने विधेयक गिरने के बाद जिस तरह से जश्न मनाया, यह शर्मनाक पल था। सीएम ने कहा- विपक्ष ने हमेशा महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। इन्होंने केवल महिला सशक्तिकरण का नारा लगाया, लेकिन वास्तव में जब आवश्यकता हुई तब उसमें रोड़े अटकाने का काम किया। सीएम ने कहा- विपक्ष कान खोलकर सुन ले, महिलाएं इस अपमान को भूलने वाली नहीं हैं। आने वाले समय में माता-बहनें इसका जवाब देंगी। सीएम भजनलाल शर्मा ने बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत की। डोटासरा ने सीएम भजनलाल शर्मा पर किया पलटवार पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सीएम पर पलटवार किया। डोटासरा ने कहा- एक पर्ची आई, दिल्ली से एक मैडम मंत्री हैं, वो पर्ची लेकर आई थीं। हम सबने देखा कि उन्होंने पर्ची दी और कहा कि इसके अलावा कुछ नहीं बोलना, यही पढ़ना है। हमारे मुख्यमंत्री पढ़ने में भी गलती कर देते हैं, उनके मन में भी थोड़ी शंका थी, मैंने सुना है। उनको कहा गया कि जितना है देख-देख कर बोल देना, अपनी तरफ से भाषण मत देना। मुख्यमंत्री कह रहे थे हमारे प्रधानमंत्री ने मातृशक्ति के लिए यह कर दिया वो कर दिया। वह महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं तो दिया कुमारी को मुख्यमंत्री बना देते। पर्ची तो उनकी ही आई थी, आपकी कैसे निकल गई। कांग्रेस ने पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष, पहली महिला प्रधानमंत्री, पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष और पहली महिला राष्ट्रपति बनाया और आप बात कर रहे हो कि कांग्रेस पार्टी महिला विरोधी है। आप महिलाओं की कितनी इज्जत करते हैं, पता है। हमारी नेता सोनिया गांधी के लिए आप किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग लोकसभा के अंदर सदन के पटल पर करते हैं। आप स्पीच में किस प्रकार के शब्द का प्रयोग करते हैं, वह पूरे देश की जनता देख रही है और आपका मूल्यांकन भी कर रही है। दीया कुमारी की बैठाकर बेइज्जती कर दी डोटासरा ने कहा कि वसुंधरा जी का जो हाल कर रखा है, सबको पता है। दीया कुमारी को बोलने नहीं दिया गया। आपकी उपमुख्यमंत्री हैं, आप बराबर में बिठाकर मीडिया के सामने बोलने का मौका नहीं दे रहे हो। किस तरह से मातृशक्ति के अधिकारों की बात कर रहे हो। हमने देखा है ना उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के कहने पर कोई अधिकारी नहीं लगता है, ना उनको कभी बजट से पहले किसी परिचर्चा में बुलाया जाता है। उनके खुद के विभाग की समीक्षा बैठक में भी नहीं बुलाया जाता है। उनको 100 रुपए की भी बजट में घोषणा नहीं करने दी जाती है और आज तो बैठाकर बेइज्जती कर दी। उनको बोलने तक नहीं दिया गया। क्या हो जाता अगर 10 मिनट वो बोल लेतीं तो।