बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और मानकीकृत शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में राजस्थान ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। भारत सरकार के राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPID) की ओर से अनुमोदित 'दिशा' पाठ्यक्रम प्रशिक्षण कार्यशाला की शुरुआत अपेक्स यूनिवर्सिटी, जयपुर में हुई। तीन दिवसीय इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में राजस्थान के 25 जिलों के 62 विशेष विद्यालयों से आए 110 विशेष शिक्षक भाग ले रहे हैं, जिन्हें बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के आधुनिक शिक्षण एवं पुनर्वास की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह दिशा पाठ्यक्रम पहले ही महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गोवा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ सहित देश के आठ राज्यों में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। अब इसे राजस्थान में भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे राज्य के हजारों बौद्धिक दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षण और पुनर्वास सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए बौद्धिक दिव्यांग अभिभावक महासंघ परिवार के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुदीप गोयल ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य विशेष शिक्षकों को ऐसी आधुनिक और वैज्ञानिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ना है, जिनके माध्यम से बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास को गति मिल सके। उन्होंने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से राज्यभर के विशेष विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को प्रशिक्षित कर एक समान एवं प्रभावी शिक्षण प्रणाली विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। एनआईईपीआईडी के निदेशक मेजर बी. वी. रामकुमार के निर्देशन में उत्तर भारत क्षेत्रीय प्रभारी जयती मित्रा एवं मीना पाहवा ने मुंबई स्थित जय वकील फाउंडेशन के विशेषज्ञों के साथ प्रतिभागियों को दिशा पाठ्यक्रम, समावेशी शिक्षण पद्धतियों, व्यवहारिक प्रशिक्षण और विशेष बच्चों के लिए प्रभावी शिक्षण तकनीकों का विस्तृत प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में अपेक्स यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रो. रघुवीर सिंह ने विशेष शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, नेतृत्व क्षमता और नवाचार आधारित शिक्षा पद्धति पर जानकारी देते हुए कहा कि बदलते समय के साथ विशेष शिक्षा में भी तकनीक का समावेश आवश्यक हो गया है। वहीं भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के कम्पोजिट रीजनल सेंटर, जयपुर के निदेशक नीरज मधुकर ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए विशेष शिक्षकों से इन योजनाओं का अधिकतम लाभ बच्चों तक पहुंचाने का आह्वान किया। निदेशालय विशेष योग्यजन के उपनिदेशक डॉ. भगवान सहाय शर्मा ने राज्य सरकार द्वारा संचालित विशेष विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न सुविधाओं और योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सरकार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के समग्र विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। कार्यशाला संयोजक नवनीता नाहटा ने बताया कि प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद प्रत्येक सहभागी विशेष विद्यालय को वहां अध्ययनरत बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांग बच्चों की संख्या के अनुसार दिशा संदर्भ शिक्षण सामग्री, वर्कशीट्स और अन्य प्रशिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि प्रशिक्षण का सीधा लाभ बच्चों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके। कार्यशाला में मौलाना आजाद केंद्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, हैदराबाद से आए विशेषज्ञ क्षितिज ने विशेष शिक्षकों को बौद्धिक दिव्यांग बच्चों के लिए विकसित दृश्य-श्रव्य वीडियो, एनिमेशन और गेमिंग आधारित शिक्षण प्लेटफॉर्म 'दिव्यांग सारथी' का प्रशिक्षण भी दिया। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बच्चों की सीखने की क्षमता को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में अपेक्स कैंपस निदेशक डी.एस. शेखावत, विशेष शिक्षा प्रभारी डॉ. कमलेश नंदिनी, पूर्णिमा अग्रवाल, स्नेहलता, परिवार के कोषाध्यक्ष अनुराग श्रीवास्तव, दिव्यांग अधिकार अधिवक्ता रवि हुजा, मित्र संस्था के अध्यक्ष संजय नाहटा सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। आयोजकों ने बताया कि प्रथम चरण में राजस्थान सरकार के अधीन संचालित अनुदानित विशेष विद्यालयों के शिक्षकों का क्षमता विकास किया जा रहा है। आगामी चरणों में इस मॉडल को राज्य के सभी विशेष विद्यालयों तथा शिक्षा विभाग के सामान्य विद्यालयों तक विस्तार दिया जाएगा, ताकि बौद्धिक एवं विकासात्मक दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, मानकीकृत और प्रभावी शिक्षण एवं पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।