राजस्थान सरकार द्वारा प्रचलित डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दरों में 40 प्रतिशत तक वृद्धि करने की प्रस्तावित योजना का क्रेडाई राजस्थान ने विरोध किया। संगठन ने कहा- यदि बिना विस्तृत सर्वे और वास्तविक बाजार दरों के आकलन के डीएलसी दरों में एक साथ इतनी वृद्धि की जाती है तो इसका सीधा असर आमजन, रियल एस्टेट उद्योग, निवेश और राज्य सरकार के राजस्व पर पड़ेगा। क्रेडाई राजस्थान के चेयरमैन अनुराग शर्मा ने कहा- समाचार पत्रों से जानकारी मिली कि राज्य सरकार डीएलसी दरों में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रही है। जबकि सामान्यतः डीएलसी दरों का निर्धारण जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा संबंधित क्षेत्रों की वास्तविक बाजार कीमतों का अध्ययन कर किया जाता है। इस बार बिना गुण-दोषों का परीक्षण किए सभी आवासीय, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी की संपत्तियों की डीएलसी दरों में वृद्धि का प्रस्ताव असंगत और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। 2024 से लगातार बढ़ रही डीएलसी दरें अनुराग शर्मा ने बताया- राज्य सरकार ने वर्ष 2024 के बजट में डीएलसी दरों में 10 प्रतिशत वृद्धि लागू की थी, जो 1 अप्रैल 2024 से प्रभावी हुई। इसके बाद 10 अक्टूबर 2025 को सड़क की चौड़ाई के आधार पर डीएलसी दरों में 10, 15 और 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त वृद्धि की गई। वहीं निर्माण दरों में भी 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा चुकी है। इससे स्टांप ड्यूटी का भार पहले ही काफी बढ़ चुका है। संगठन ने कहा- लगातार बढ़ती डीएलसी दरों का असर केवल रियल एस्टेट कारोबार पर ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है। 'रियल एस्टेट उद्योग पर आएगी मंदी' चेयरमैन अनुराग शर्मा ने कहा- वर्तमान में वैश्विक परिस्थितियों और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण निर्माण लागत पहले से ही बढ़ी हुई है। ऐसे समय यदि बिना ठोस विश्लेषण के डीएलसी दरों में भारी वृद्धि की जाती है तो रियल एस्टेट उद्योग गंभीर मंदी का शिकार हो सकता है। उन्होंने कहा- कृषि के बाद रियल एस्टेट सबसे बड़ा रोजगार देने वाला उद्योग है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 381 से अधिक छोटे-बड़े उद्योग जुड़े हुए हैं। उद्योग प्रभावित होने से रोजगार के अवसर घटेंगे और राज्य सरकार के राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। 15 हजार करोड़ के राजस्व लक्ष्य पर भी असर की आशंका अनुराग शर्मा ने बताया- वर्ष 2024-25 में राजस्थान सरकार को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन से 10,542 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने 15 हजार करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा है। उनका कहना है कि यदि डीएलसी दरें अव्यावहारिक रूप से बढ़ाई गईं तो संपत्ति खरीद-बिक्री प्रभावित होगी और सरकार के लिए यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। शहरी सेवा शिविरों में पट्टे लेना भी होगा महंगा क्रेडाई ने कहा- राज्य सरकार आमजन को राहत देने के उद्देश्य से शहरी सेवा शिविर चला रही है, लेकिन यदि डीएलसी दरें बढ़ती हैं तो इन शिविरों के माध्यम से मिलने वाले पट्टों पर भी अधिक शुल्क देना पड़ेगा। इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। 'डीएलसी बढ़ने से आमजन पर बढ़ेगा करों का भार' क्रेडाई राजस्थान के अध्यक्ष रविंद्र प्रताप सिंह ने कहा- डीएलसी दरें अधिकांश करों और शुल्कों का आधार होती हैं। ऐसे में इनके बढ़ने से आमजन को विभिन्न विभागों में अधिक कर और शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि अन्य विकसित राज्यों की तर्ज पर कर व्यवस्था को सरल और व्यावहारिक बनाया जाए। 'जनप्रतिनिधियों की राय के बिना नहीं हो निर्णय' महासचिव आशीष अग्रवाल ने कहा- पूर्व में डीएलसी दरों में संशोधन से पहले क्रेडाई और जनप्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाते थे, जिससे दरें व्यावहारिक रहती थीं। इस बार बिना व्यापक परामर्श के वृद्धि का प्रस्ताव स्थापित परंपराओं के विपरीत है। 'राइजिंग राजस्थान' और बढ़ती लागत में विरोधाभास कार्यकारी अध्यक्ष अनिल गुप्ता ने कहा- एक ओर राज्य सरकार 'राइजिंग राजस्थान' अभियान के जरिए निवेश आकर्षित करने का प्रयास कर रही है। वहीं दूसरी ओर डीएलसी दरें बढ़ाकर परियोजनाओं की लागत बढ़ाई जा रही है। इससे नए निवेश और रियल एस्टेट परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। रजिस्ट्रेशन शुल्क में संशोधन की मांग वाइस चेयरमैन राजेंद्र सिंह पचार ने कहा- राजस्थान में पहले से ही स्टांप ड्यूटी अधिक है। इसके अलावा संपत्ति मूल्य का 1 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाता है, जिसकी पहले अधिकतम सीमा दो लाख रुपए थी, लेकिन अब यह सीमा समाप्त हो चुकी है। उनका कहना है कि अन्य राज्यों की तुलना में यह व्यवस्था अधिक महंगी है और इसे जनहित में संशोधित किया जाना चाहिए। इसका असर सरकार पर भी पड़ेगा, जहां सरकार का एक विभाग राजस्व करोड़ों में अर्जित करेगा। वहीं सरकार को जब नेशनल हाईवे या अन्य प्रोजक्ट के लिए जमीन लेनी होगी तो महंगी जमीन खरीदनी पड़ेगी। आयकर का भी बढ़ सकता अतिरिक्त बोझ क्रेडाई राजस्थान के प्रवक्ता मदन यादव ने कहा- डीएलसी दरों में वृद्धि होने से संपत्ति खरीदने वाले लोगों को अतिरिक्त स्टांप ड्यूटी के साथ-साथ कई मामलों में आयकर अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी अतिरिक्त कर देना पड़ सकता है। सरकार से विस्तृत सर्वे कराने की मांग क्रेडाई राजस्थान के कोषाध्यक्ष गिर्राज अग्रवाल ने राज्य सरकार से मांग की कि डीएलसी दरों में किसी भी प्रकार की वृद्धि से पहले सभी क्षेत्रों का वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर विस्तृत सर्वे कराया जाए। जनप्रतिनिधियों और संबंधित हितधारकों से सुझाव लेने के बाद ही नई डीएलसी दरें लागू की जाएं।