फर्जी एफएमजी (Foreign Medical Graduate) स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट बनवाने पर राजस्थान SOG ने विदेश से एमबीबीएस करने वाले एक डॉक्टर को सोमवार को डीग से गिरफ्तार किया। आरोपी चरण सिंह (27) पुत्र दीपचंद निवासी गोपालगढ़ तहसील पहाड़ी जिला डीग एफएमजी परीक्षा में कई बार फेल हो गया था। इसके बाद आरोपी चरण सिंह ने 24 लाख रुपए देकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया। बाद में राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में रजिस्ट्रेशन कराकर धौलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप की। एसओजी के ADG विशाल बंसल ने बताया- विदेश से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने से पहले एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा में पास होना जरूरी है। मामले में फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने के मामले में एसओजी थाना जयपुर में 4 फरवरी को धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क विशाल बंसल ने बताया- जांच के दौरान सामने आया कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले कई अभ्यर्थी राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBE) की ओर से आयोजित एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर सके थे। इसके बाद उन्होंने बिचौलियों से फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट तैयार कराए। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराया और प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी की। इस खेल में मेडिकल काउंसिल के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। कजाकिस्तान में से की पढ़ाई, FMG परीक्षा में फेल विशाल बंसल ने बताया- आरोपी चरण सिंह ने साल 2017 से 2022 के बीच कजाकिस्तान के अल्माटी विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। भारत लौटने के बाद चरण सिंह ने FMG स्क्रीनिंग परीक्षा कई बार दी, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद कजाकिस्तान में साथ पढ़ने वाले नफीस खान के माध्यम से 24 लाख रुप, में फर्जी FMG सर्टिफिकेट तैयार कराया। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर चरण सिंह ने राजकीय मेडिकल कॉलेज धौलपुर में आवेदन कर इंटर्नशिप पूरी कर ली। नफीस खान ने भी बनवाया था फर्जी सर्टिफिकेट जांच में सामने आया कि आरोपी नफीस खान ने भी खुद का जून 2023 में एफएमजी सर्टिफिकेट फर्जी तरीके से तैयार कराया था। इस आधार पर नफीस खान ने इंटर्नशिप पूरी कर मई 2024 में तत्कालीन आरएमसी रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा की मिलीभगत से प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन भी हासिल कर लिया था। 20 से 30 लाख रुपए लेकर तैयार किए फर्जी दस्तावेज जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी भानाराम माली, सहयोगी शुभम गुर्जर और इंद्रराज गुर्जर ने हर अभ्यर्थी से 20 से 30 लाख रुपए लेकर फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट तैयार करवाया। इसके बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने का पूरा इंतजाम किया। पहले भी हो चुकी कई गिरफ्तारियां एसओजी मामले में पहले ही फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन कराने वाले 23 विदेशी मेडिकल स्नातक डॉक्टरों, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन, मुख्य आरोपी भानाराम माली और एक दलाल को गिरफ्तार कर चुकी है। 100 से ज्यादा संदिग्ध डॉक्टर चिन्हित महानिरीक्षक पुलिस अजयपाल लांबा, उपमहानिरीक्षक भुवन भूषण यादव और पुलिस अधीक्षक कुंदन कंवरिया के निर्देशन में उपाधीक्षक पुलिस जितेंद्र नावरिया की जांच में अब तक विदेश से एमबीबीएस करने वाले 100 से अधिक संदिग्ध डॉक्टरों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार सहित 28 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। एसओजी ने बताया- मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। इस फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य डॉक्टरों, बिचौलियों तथा अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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