राजस्थान की कला और संस्कृति का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले रवीन्द्र मंच की बदहाल स्थिति डिप्टी सीएम दीया कुमारी के निरीक्षण में सामने आई। 6 महीने से बंद पड़े एसी, टूटी हुई कुर्सियां, उखड़ा प्लास्टर और खराब रखरखाव देखकर उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रवीन्द्र मंच का जल्द रिनोवेशन कराया जाएगा, लेकिन केवल मरम्मत से काम नहीं चलेगा। इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर की नियमित और बेहतर मेंटेनेंस व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि कलाकारों और दर्शकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। दरअसल, सोमवार करीब दोपहर 12:15 बजे डिप्टी सीएम एवं कला-संस्कृति मंत्री दीया कुमारी रामनिवास बाग स्थित रवीन्द्र मंच का निरीक्षण करने पहुंचीं थीं। पहले देखिए, रवींद्र मंच की बदहाली के PHOTO'S
रवींद्र मंच की जर्जर हालत को देखकर चिंतित दिखीं दीया कुमारी निरीक्षण के दौरान मंच की जर्जर होती व्यवस्थाओं को देखकर वे चिंतित नजर आई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रवीन्द्र मंच को तत्काल व्यापक रिनोवेशन की आवश्यकता है, लेकिन केवल भवन का नवीनीकरण ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भविष्य में इसके बेहतर रखरखाव और संचालन की भी मजबूत व्यवस्था करनी होगी। डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने अधिकारियों से कहा कि रवीन्द्र मंच को ऐसा सांस्कृतिक केंद्र बनाया जाए, जहां नियमित कार्यक्रम हों, लगातार बुकिंग मिले और यह सेल्फ सस्टेनेबल (आत्मनिर्भर) मॉडल के रूप में विकसित हो सके। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि कुछ वर्ष पहले करोड़ों रुपए खर्च कर यहां रिनोवेशन कराया गया था, लेकिन आज फिर इसकी स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। निरीक्षण में सामने आईं गंभीर खामियां निरीक्षण के दौरान रवीन्द्र मंच की लगभग हर व्यवस्था बदहाल नजर आई। मुख्य ऑडिटोरियम की कई कुर्सियां टूटी हुई मिलीं। सभागार के अंदर मृत चूहों की बदबू आने से साफ-सफाई की स्थिति भी सवालों के घेरे में दिखीं। लाइटिंग सिस्टम खराब मिला और मुख्य मंच का पर्दा फटा हुआ था, जिसे टेप लगाकर किसी तरह यूज किया जा रहा है। सबसे बड़ी समस्या मुख्य ऑडिटोरियम की एयर कंडीशनिंग व्यवस्था की सामने आई। कुछ महीने पहले एसी के वायर चोरी हो गए थे, जिसके बाद से पूरा एसी सिस्टम बंद पड़ा है। गर्मी के कारण कई आयोजकों ने यहां कार्यक्रम करने से परहेज किया और रवीन्द्र मंच को बुकिंग भी नहीं मिल पाई। निरीक्षण के दौरान इस मामले पर भी अधिकारियों से जवाब मांगा गया। ग्रीन रूम की हालत भी बेहद खराब मिली। यहां टूटे हुए शीशे, क्षतिग्रस्त ड्रॉअर, खराब लाइटिंग और दीवारों में सीलन साफ दिखाई दी। कलाकारों के उपयोग में आने वाले बाथरूम भी जर्जर अवस्था में मिले। मुख्य भवन की छत से प्लास्टर झड़ चुका है। कई स्थानों पर सीलन के कारण छत का हिस्सा टूटकर गिर चुका है और लोहे के सरिए तक दिखाई देने लगे हैं। मिनी ऑडिटोरियम में भी कुर्सियां, लाइटिंग और अन्य व्यवस्थाएं खराब मिलीं। रिहर्सल हॉल और ओपन थिएटर की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। मेंटेनेंस पर उठे सवाल रवीन्द्र मंच की वर्तमान स्थिति ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि जब कुछ वर्ष पहले यहां करोड़ों रुपए खर्च कर रिनोवेशन कराया गया था, तो उसका उचित रख-रखाव क्यों नहीं हो सका। एसी के वायर चोरी होने के कई महीने बाद भी उन्हें बदला नहीं गया। सुरक्षा एजेंसी के खिलाफ भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन लगातार बजट की कमी का हवाला देता रहा, जबकि इसी कारण मंच को कार्यक्रमों और बुकिंग का भी नुकसान उठाना पड़ा। राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान है रवीन्द्र मंच रामनिवास बाग स्थित रवीन्द्र मंच राजस्थान की सांस्कृतिक गतिविधियों का सबसे प्रतिष्ठित केंद्र माना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1966 में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की स्मृति में की गई थी। पिछले लगभग छह दशकों से यह मंच नाटक, संगीत, नृत्य, साहित्य, लोककला और सांस्कृतिक आयोजनों का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जवाहर कला केंद्र और प्रदेश की विभिन्न सांस्कृतिक संस्थाओं के कई प्रतिष्ठित आयोजन वर्षों तक यहीं होते रहे हैं। राज्य के अधिकांश राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के नाट्य महोत्सव, संगीत समारोह, शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुतियां और साहित्यिक आयोजन इसी मंच से जुड़े रहे हैं। यहीं से मिली कई कलाकारों को पहचान रवीन्द्र मंच केवल एक सभागार नहीं, बल्कि राजस्थान के कलाकारों की प्रतिभा का सबसे बड़ा मंच रहा है। यहां से प्रदेश के अनेक रंगकर्मियों, संगीतकारों और नृत्यांगनाओं ने अपने करियर की शुरुआत की। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) और मुंबई फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचे कई कलाकारों ने अपने शुरुआती नाट्य प्रदर्शन इसी मंच पर किए। राजस्थान के वरिष्ठ रंगकर्मी राकेश बेदी (मूल रूप से जयपुर रंगमंच से जुड़े शुरुआती दौर), अमिताभ श्रीवास्तव, सुरेश अलबेला, राजेंद्र गुप्ता, गोविंद नामदेव जैसे राष्ट्रीय स्तर के रंगकर्मियों की प्रस्तुतियों का भी यह मंच साक्षी रहा है। इसके अलावा देश के दिग्गज कलाकारों नसीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर, रत्ना पाठक शाह, ओम पुरी, मनोज जोशी, कुमुद मिश्रा, संजय मिश्रा, मकरंद देशपांडे सहित कई रंगकर्मियों के चर्चित नाटकों का मंचन भी रवीन्द्र मंच पर होता रहा है। जयपुर के स्थानीय रंगमंच समूहों की पीढ़ियां इसी मंच पर तैयार हुई हैं। यहां अभिनय सीखने वाले कई कलाकार बाद में फिल्मों, टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म तक पहुंचे।