सरकार शिक्षा में सुधार, नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट कम करने के दावे कर रही है, लेकिन स्कूलों में स्टाफ की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। शाला दर्पण पोर्टल के 1 जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में शिक्षा विभाग के मंजूर 4 लाख 13 हजार 910 पदों में से 2 लाख 93 हजार 760 पदों पर ही कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि 1 लाख 20 हजार 150 पद खाली पड़े हैं। टोंक जिले में भी 3588 मंजूर पदों में से 2547 पद भरे हुए हैं, जबकि 1041 पद खाली हैं। स्कूलों में शिक्षक, प्रिंसिपल, प्रयोगशाला सहायक, लाइब्रेरियन और सहायक कर्मचारियों की कमी के कारण पढ़ाई की गुणवत्ता, नामांकन और बच्चों के स्कूल में बने रहने पर असर पड़ रहा है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि पर्याप्त स्टाफ के बिना शिक्षा सुधार के लक्ष्य कैसे पूरे होंगे। एक शिक्षक को पढ़ानी पड़ रही कई कक्षाएं राज्य के सरकारी स्कूलों में मानव संसाधनों की भारी कमी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर रही है। कई स्कूलों में शिक्षक कम होने के कारण एक ही शिक्षक को कई कक्षाएं पढ़ानी पड़ रही हैं। वहीं कई जगहों पर विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में स्थिति और ज्यादा गंभीर है। कई स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो पा रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ के बिना शिक्षा सुधार की योजनाएं जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो पाएंगी। भर्ती के बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुश्किल शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि जब तक स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद नहीं भरे जाएंगे, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाग को जल्द नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। साथ ही बकाया वरिष्ठ अध्यापक और लेक्चरर पदोन्नति, स्टाफिंग पैटर्न, पदोन्नत प्रिंसिपल और उप प्रिंसिपल की काउंसलिंग प्रक्रिया भी जल्द पूरी कर खाली पद भरने चाहिए। नामांकन और ठहराव पर भी पड़ रहा असर सरकार की ओर से नामांकन बढ़ाने के लिए अलग-अलग अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और गतिविधियां नहीं होने के कारण बच्चों का स्कूल से जुड़ाव कमजोर पड़ जाता है। जहां शिक्षक कम होते हैं वहां पढ़ाई नियमित नहीं हो पाती। गतिविधियां सीमित रह जाती हैं और बच्चों की पढ़ाई में रुचि कम होने लगती है। ऐसी स्थिति में कई बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं या नियमित रूप से स्कूल नहीं आते। राजस्थान में शिक्षा विभाग में पदों की स्थिति टोंक जिले में पदों की स्थिति सहायक कर्मचारियों की कमी भी बनी परेशानी स्कूलों में केवल शिक्षकों की ही नहीं बल्कि प्रशासनिक और सहायक कर्मचारियों की कमी भी कामकाज को प्रभावित कर रही है। कनिष्ठ सहायक, वरिष्ठ सहायक, प्रयोगशाला परिचारक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हजारों पद खाली हैं। इसके कारण कई स्कूलों में शिक्षकों को ही कार्यालय और प्रबंधन से जुड़े काम भी संभालने पड़ते हैं। इससे पढ़ाई के लिए मिलने वाला समय कम हो जाता है और शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है।