बालोतरा की पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन के साथ ही इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा। यह इलाका देश के सबसे तेजी से उभरते ऊर्जा केंद्र (एनर्जी सेंटर) में स्थापित हो जाएगा। बाड़मेर के रेगिस्तान में तेल और गैस उत्पादन, आधुनिक पाइपलाइन नेटवर्क के बाद रिफाइनरी परियोजना का उद्घाटन होने जा रहा है। इसके साथ राजस्थान पहली बार अपस्ट्रीम (रिफाइनरी) , मिडस्ट्रीम (पाइप लाइन) और डाउनस्ट्रीम (प्रोडेक्शन) का सेंटर बनने जा रहा है। एक्सपर्ट बोले-एनर्जी का नया ईको-सिस्टम ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ कहते हैं- राजस्थान में विकसित हो रहा यह ऊर्जा ईको-सिस्टम भारत की एनर्जी रणनीति में बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन है। जियोलॉजी एलुमिनी एसोसिएशन के राजस्थान चैप्टर के सचिव हुकमाराम चौहान ने बताया- यह पहली बार है जब किसी एक ही एरिया में एनर्जी की पूरी चेन का इतना बड़ा एकीकरण हुआ है। राष्ट्रीय ऊर्जा मानचित्र पर ये अत्यंत महत्वपूर्ण है। थार मरुस्थल में केयर्न की ओर से तेल-गैस की खोज ने इस क्षेत्र की संभावनाओं को नई दिशा दी। मंगला जैसे बड़े तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल के प्रोडक्शन ने यह साबित किया कि चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में भी विश्वस्तरीय एनर्जी विकसित की जा सकती है। पाइप लाइन से रिफाइनरी पहुंचा था क्रूड इसके बाद मिडस्ट्रीम नेटवर्क विकसित हुआ। राजस्थान में पहली बार दुनिया की सबसे लंबी हीटेड पाइपलाइन का विकास और संचालन किया गया। 2009 से कच्चे तेल के व्यावसायिक उत्पादन की शुरुआत हुई। केयर्न ने मंगला क्षेत्र से कच्चा तेल लगभग 705 किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक हीटेड पाइपलाइन के माध्यम से गुजरात के भोगत तट तक पहुंचाया। जहां से इसे आगे रिफाइनरियों को भेजा जाता है। इस प्रणाली से सप्लाई करने के साथ-साथ भारत की ऊर्जा लॉजिस्टिक्स क्षमता को भी मजबूत किया है। अब राजस्थान की पहली रिफाइनरी भी शामिल अब यह क्षेत्र अपने विकास के तीसरे और निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है। जिसमें देश की सबसे आधुनिक और राजस्थान की पहली रिफाइनरी परियोजना शामिल है। जिसका उद्घाटन 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। इसके शुरू होने के बाद पहली बार अपस्ट्रीम, मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम—तीनों प्रक्रियाएँ एक ही भौगोलिक क्षेत्र में एकीकृत रूप से संचालित होंगी।