कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आईएएस शिखर अग्रवाल को एपीओ करने के मामले में राज्य सरकार पर तंज कसा है। डोटासरा ने पूरे मामले में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए ईडी-सीबीआई से जांच करवाने का चैलेंज दिया है। डोटासरा ने कहा- बीजेपी सरकार का पाप का घड़ा भर चुका है और फूट रहा है, अभी तो उसमें से सुराग निकल रहे हैं। पहले सुधांश पंत को हटाया गया, फिर शिखर अग्रवाल को यहां से हटाया गया, फिर डीजीपी बनने की कहानी शुरू हुई। एक-दूसरे की से ओर शह-मात का खेल चल रहा है। सरकार में बैठे हुए नेता और अफसरों का भ्रष्टाचार का धीरे-धीरे भंडाफोड़ हो रहा है, यह उसकी शुरुआत है यह पहली कड़ी है कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने कहा- मुख्यमंत्री मगरमच्छ ढूंढ रहे थे, मुख्यमंत्री को मगरमच्छ मिलने शुरू हो गए होंगे। आप कांग्रेस पर आरोप लगा रहे थे। ये जो दौलतपुरा में पहाड़ पर रिजॉर्ट काट रहे थे, उसकी नीलामी को आखिरी डेडलाइन से दो घंटे पहले किसके इशारे पर क्यों रोका गया और कितना बड़ा खेल करने का षड्यंत्र सरकार में बैठे हुए लोगों ने रचा है।
ED, CBI भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनी है तो इस मामले में भी जांच करवाएं डोटासरा ने कहा- जो अफसर सीएमओ में सीएम का सबसे नजदीक था, यह छोटा पद नहीं होता है, उसके जितने फैसले होते हैं वह सीएम के फैसले माने जाते हैं। कंपनी को जो भी रिलीफ दी गई है, वो सीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ने दी है। सीएम को जांच भी करनी चाहिए। ये ईडी, इनकम टैक्स सीबीआई क्या कांग्रेस को डराने, धमकाने के लिए बनी है या भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनी है। अगर भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनी है तो इस मामले में भी जांच करवाएं। किस अफसर से किसको निपटाना ये भाजपा का खेल डोटासरा ने कहा- यह खेल तो भाजपा का ही है। किस अफसर से किसको निपटाना है, कागज कहां से लाना है, यह तो भाजपा ही दे रही है। ये तो अपना भेद खुद ही खोलने में लगे हैं। आप देखना अगर इनके साथ कुछ हुआ यह किस-किस के साथ क्या-क्या खेल करेंगे यह भी देखने वाली बात है। जिसने दो साल सरकार चलाई वो चुप थोड़े ही बैठेगा डोटासरा ने सुधांश पंत को लेकर कहा- दो साल जिसने सरकार चलाई हो, वो ऐसे ही थोड़े ही बैठा है। राजनीति में नेता एक-दूसरे पर भाले फेंकते हैं तो अफसर बच जाते हैं, लेकिन अफसर एक-दूसरे पर भाले फेंकते हैं तो सरकार भी निपटेगी और यह भी निपटाएंगे। केवल एक अफसर की बात नहीं है। यह पूरी सरकार की कार्य शैली को उजागर कर दिया है। यह ब्यूरोक्रेट्स की नहीं, भ्रष्टाचार की लड़ाई डोटासरा ने कहा- यहां से किसी को भेजोगे तो वह कुछ तो करेगा, वह भी सीनियर आईएएस है, सीएस रहा है, उसे हटाए कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। वो भी अपने साथ सीएमओ का एक विकेट लेकर गया था । यह जो आपस की लड़ाई है, यह केवल ब्यूरोक्रेसी की आपसी लड़ाई नहीं है। यह भ्रष्टाचार की लड़ाई है और इसमें ऊपर से नीचे तक सारे लोग इस भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं। आगे अब राजनेताओं के मामले आएंगे डोटासरा ने कहा- ये ऊपर के एक और दो नंबर की लड़ाई में जिस जिसके पात्र बने हुए हैं, उन पात्रों को निपटाना, उनकी बातें बाहर निकालने का जो खेलना शुरू हुआ है वो रुकने वाला नहीं है। अभी तो ब्यूरोक्रेट्स की बातें आने लगी हैं, आगे राजनेताओं के भी मामले आने लगेंगे। जो भ्रष्टाचार इस सरकार में बैठे हुए लोगों ने किया है वो देश के इतिहास में किसी राज्य में कभी नहीं हुआ । ---------- मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… क्यों गिरी शिखर अग्रवाल पर गाज?:33 साल की नौकरी में पहली बार एपीओ, सरकार का क्लियर मैसेज, क्या संपत्ति खरीदना गलत? आसान सवालों में जानिए विला-कॉटेज खरीद मामला,IAS शिखर अग्रवाल को सभी पदों से हटाया:IPS पत्नी के साथ खरीदी थी प्रॉपर्टी, फिर उसी कंपनी को लीज पर दी IAS शिखर, IPS पत्नी प्रशाखा के परिवार के 40 विला-कॉटेज:ढाई साल में एक ही कंपनी से खरीदे, दोनों बेटों और सास-ससुर के नाम भी प्रॉपर्टी