राजस्थान हाईकोर्ट ने 30 साल पुराने मारपीट मामले में निचली अदालत का फैसला बदला है। जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने आरोपी मांगीलाल को साधारण चोट पहुंचाने से बरी रखा, लेकिन गंभीर चोट पहुंचाने का दोषी ठहराया। मामले के हालात और लंबे समय बाद फैसला आने के कारण कोर्ट ने मांगीलाल को जेल भेजने के बजाय परिवीक्षा का फायदा दिया। यह घटना 6 अक्टूबर 1996 की है, जब मांगीलाल ने गोपालदास के साथ लाठी, लात-घूंसों से मारपीट की थी। गोपालदास को फ्रैक्चर सहित कई चोटें आई थीं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 17 नवंबर 1998 को गवाहों के बयानों में अंतर के आधार पर आरोपी को बरी किया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील पर माना कि निचली अदालत ने छोटी कमियों को ज्यादा अहमियत दी। घायल के बयान और मेडिकल सबूत मारपीट की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने मांगीलाल को धारा 325 के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर परिवीक्षा दी। उसे 2 हजार रुपए का बॉन्ड भरने और गोपालदास को तीन महीने में 50 हजार रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। मांगीलाल को चार सप्ताह में ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होना होगा।