राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने जोधपुर डिस्कॉम में हुए बिजली एक्सीडेंट के मामलों की सुनवाई जयपुर की निचली कोर्ट में करने की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई है। इस मामले में हाईकोर्ट ने फटकार लगाते जयपुर की निचली अदालत से ऐसे मामलों में पारित हुए 10 लाख 73 हजार 860 रुपए के मुआवजा अवार्ड पर भी रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने जयपुर मेट्रो फर्स्ट, जयपुर मेट्रो सेकेंड और जयपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से ऐसे पेंडिंग पड़े मामलों की रिपोर्ट तलब की है। दरअसल जोधपुर विद्युत वितरण निगम लि. (JVVNL) की ओर से दायर की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जयपुर की पीठ के न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने ये आदेश दिया। मुआवजे के लिए जयपुर कोर्ट में लगाया था केस जोधपुर विद्युत वितरण निगम लि. की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता जितेंद्र कुमार ताकर ने बताया- बज्जू जिला बीकानेर में बिजली संबंधी दुर्घटना हुई, जो जोधपुर डिस्कॉम के क्षेत्राधिकार में आता है, लेकिन मुआवजे के लिए केस जयपुर मेट्रो कोर्ट में लगाया गया। इस मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट जयपुर ने उल्लेख किया कि जोधपुर डिस्कॉम का कार्यालय जोधपुर में है। उसका कार्यक्षेत्र जोधपुर और बीकानेर डिवीजन तक है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में निगम के अध्यक्ष और एमडी को पक्षकार बनाकर उनका पता विद्युत भवन ज्योति नगर जयपुर दर्शाने की प्रथा व्यापक रूप से प्रचलित है। हाईकोर्ट ने इसे क्षेत्राधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि इस संबंध में न्यायालय पहले भी आपत्ति जता चुका है। कोर्ट ने अब मामले पर अगली सुनवाई 30 नवंबर को तय की है।