राजस्थान हाईकोर्ट ने विधवा महिला की फैमिली पेंशन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जिस तरीके से विभाग का अधिकारी बिना तैयारी के कोर्ट में पेश हुआ, उससे साफ लगता है कि राज्य के अधिकारी न्यायालय की कार्यवाही को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यह टिप्पणी जस्टिस गणेश राम मीणा की अदालत ने गंगा देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। दरअसल, शनिवार को वकीलों के कार्य बहिष्कार के कारण सरकारी वकील की अनुपस्थिति में पेंशन एवं पेंशन कल्याण विभाग के एएओ और मामले के ऑफिसर इन चार्ज (OIC) हमीर सिंह कोर्ट में पेश हुए। सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने उनसे विभाग की ओर से दाखिल जवाब और याचिकाकर्ता के दावे से जुड़े सरकारी आदेशों, अधिसूचनाओं के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उनके पास इनमें से कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। कोर्ट ने इसके बाद अधिकारी से पूछा कि क्या उन्होंने OIC के कर्तव्यों और राज्य सरकार की लिटिगेशन पॉलिसी पढ़ी है। इस पर अधिकारी ने स्वीकार किया कि उन्होंने कभी लिटिगेशन पॉलिसी नहीं देखी। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह विभागीय लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है। कोर्ट ने कहा- यह स्थिति स्वीकार्य नहीं हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला किसी सामान्य विवाद का नहीं, बल्कि एक विधवा की फैमिली पेंशन का है। ऐसे संवेदनशील मामले में भी विभाग का अधिकारी बिना आवश्यक रिकॉर्ड और जानकारी के अदालत में उपस्थित हुआ, जो स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि किसी कारण से सरकारी वकील अदालत में मौजूद नहीं हों, तो संबंधित OIC को पूरी केस फाइल, सभी आवश्यक आदेश, अधिसूचनाएं और मामले के तथ्यों की पूरी जानकारी के साथ उपस्थित होना चाहिए। साथ ही जवाब समय पर दाखिल किया जाना चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। मुख्य सचिव और विभाग को भेजा आदेश हाईकोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव और निदेशक, पेंशन और पेंशन कल्याण विभाग को आदेश की कॉपी भेजने के निर्देश देते हुए कहा कि सरकार सभी विभागों के OIC को उनकी जिम्मेदारियों के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को होगी।