राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने बाड़मेर में जिला कांग्रेस कमेटी के प्रस्तावित कार्यालय की जमीन से जुड़े विवाद में अहम आदेश दिया है। जस्टिस कुलदीप माथुर की एकल पीठ के सोमवार को दिए आदेश में नगर परिषद बाड़मेर के नोटिस के तहत की जाने वाली किसी भी बाध्यकारी कार्रवाई (Coercive Action) पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही मामले ने बाड़मेर में राजनीतिक तूल पकड़ लिया था, जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रशासन पर 'राजनीतिक द्वेष' का आरोप लगाते हुए धरना-प्रदर्शन भी किया था। लंबित निर्माण स्वीकृति, गर्माया था राजनीतिक माहौल याचिकाकर्ता जिला कांग्रेस कमेटी बाड़मेर के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि नगर परिषद ने 13 जनवरी 2023 को खसरा नंबर 2505/1189 में 2000 वर्गमीटर भूमि का पट्टा उनके पक्ष में जारी किया था। पट्टा मिलने के बाद 22 मई 2023 को निर्माण अनुमति के लिए विधिवत आवेदन किया गया, जो आज भी संबंधित विभाग में लंबित है। पार्टी का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर निर्माण अनुमति नहीं दी जा रही है। चारदीवारी का निर्माण और धारा 194 का विवादित नोटिस डीसीसी की ओर से कोर्ट में बताया गया- जमीन के आसपास हो रहे अतिक्रमण से बचाने के लिए जब याचिकाकर्ता ने अपनी भूमि पर केवल चारदीवारी का निर्माण शुरू किया, तो नगर परिषद ने तुरंत 10 अप्रैल को नगरपालिका अधिनियम की धारा 194 के तहत एक नोटिस थमा दिया। स्थानीय प्रशासन ने कुछ ही घंटों में निर्माण हटाने की चेतावनी दी थी, जिससे राजनीतिक टकराव की स्थिति पैदा हो गई और याचिकाकर्ता को अपनी चारदीवारी ध्वस्त होने की संभावना सताने लगी। वकीलों की दलीलें और नगर परिषद की अनुपस्थिति याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट राजेश परिहार, श्रवण गोदारा और हनुमान राम मुंडन ने पैरवी की। उनका मुख्य कानूनी तर्क यह था कि केवल चारदीवारी बनाना विवादित भूमि पर 'भवन निर्माण' की श्रेणी में नहीं आता है, इसलिए धारा 194 का नोटिस कानूनी रूप से अनुचित है। इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि इतनी बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक रस्साकशी के बावजूद, सुनवाई के दौरान प्रतिवादी नगर परिषद बाड़मेर की ओर से पक्ष रखने के लिए कोई भी अधिवक्ता अदालत में उपस्थित ही नहीं हुआ। कोर्ट का स्टे: कार्रवाई पर रोक इन तमाम दलीलों और तथ्यों को सुनने के बाद जस्टिस कुलदीप माथुर ने नगर परिषद के 10 अप्रैल के नोटिस के तहत किसी भी प्रकार की 'बाध्यकारी कार्रवाई' करने पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही दोनों पक्षों को मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में नगर परिषद निर्माण की अनुमति जारी कर देती है, तो याचिकाकर्ता नियमों और शर्तों के अनुरूप निर्माण कार्य कर सकेगा।