हाईकोर्ट ने राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था में कमियों को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने राज्य के प्रमुख चिकित्सा सचिव को कैग की 2024 की रिपोर्ट में बताई गई खामियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए कहा। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा ने बेंच ने असीम सिमलोट की जनहित याचिका ​पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुरक्षा और परिचालन मानकों की पालना नहीं हो रही है। इनमें भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस) बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियम और अनिवार्य अग्निशमन सुरक्षा मानदंड शामिल है। कैग की रिपोर्ट में भी चेताया गया याचिकाकर्ता ने बताया- इन व्यवस्थागत विफलताओं को पहले भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की 2024 की रिपोर्ट में भी बताया गया था, लेकिन कैग की स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद राज्य सरकार ने कोई प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसके कारण सरकारी अस्पतालों में मरीजों की मौत, चोटिल होना, चिकित्सा लापरवाही और अन्य दुर्घटनाओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि कैग की सिफारिशों को समय रहते और प्रभावी ढंग से लागू किया होता, तो कई दुखद घटनाओं को रोका जा सकता था। समान मुआवजा नीति बनाए सरकार याचिका में चिकित्सा लापरवाही और अस्पताल से जुड़ी दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए पूरे राज्य में एक समान मुआवजा योजना तैयार करने की भी मांग की गई है। कोर्ट ने मामले में सरकार को नोटिस देते हुए सुनवाई 19 अगस्त तक टाल दी।