रूस-यूक्रेन के बाद अब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने राजस्थान की औद्योगिक इकाइयों की कमर तोड़ कर रख दी है। रेड सी और हॉर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई चेन बाधित होने से प्रदेश के मार्बल, ग्रेनाइट और टेक्सटाइल सेक्टर में हाहाकार मचा है। हालात यह हैं कि मुंद्रा पोर्ट पर कंटेनर डंप पड़े हैं और शिपिंग चार्ज 5 से लेकर 6 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। 2 लाख श्रमिकों के सामने अब रोटी का संकट खड़ा हो गया है। अकेले चित्तौड़गढ़ में मार्बल उत्पादन 50% घट गया है। 24 घंटे चलने वाली यूनिट्स 12 घंटे ही चल रही हैं। जालोर में 50% ग्रेनाइट इकाइयां बंद होकर उत्पादन 13 लाख से घटकर 4.55 लाख वर्ग फीट रह गया है। भीलवाड़ा में 800 से 1000 करोड़ रुपए के एक्सपोर्ट ऑर्डर अटके हैं। लागत 20-30% बढ़ गई है। 1. चित्तौड़गढ़- 24 घंटे चलने वाली मशीनें अब 12 घंटे पर आईं मार्बल सिटी चित्तौड़गढ़ में अंतरराष्ट्रीय सप्लाई ठप होने से उत्पादन आधा रह गया है। लागत का गणित बिगड़ा : क्रूड ऑयल महंगा होने से प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की कीमतें 50% तक बढ़ गई हैं। यूनिट्स की हालत : जिले की 300 यूनिट्स में से इंपोर्ट-एक्सपोर्ट पर निर्भर फैक्ट्रियां बंदी के कगार पर हैं। आमदनी में 50% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। व्यापारी बोले- एक्सपोर्ट में नुकसान, उत्पादन लागत बढ़ी चित्तौड़गढ़ मार्बल लघु उद्योग के प्रांत उपाध्यक्ष ज्ञान मेहता के अनुसार, जिले में करीब 300 यूनिट्स हैं, जिनमें 35 इंपोर्ट और 5-7 एक्सपोर्ट से जुड़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय सप्लाई पर निर्भर इन यूनिट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। एक्सपोर्ट लगभग ठप हो गया है। इंपोर्ट यूनिट्स पहले हर महीने 7000 टन मार्बल और 500 टन ग्रेनाइट मंगवाकर रोज 42 हजार स्क्वायर फीट उत्पादन करती थीं, लेकिन अब सप्लाई घटने से यूनिट्स आधी क्षमता पर चल रही हैं और आमदनी में करीब 50% तक कमी आई है। करीब 265 यूनिट्स हर महीने 1.35 लाख टन रॉ मटेरियल प्रॉसेस कर रोज 6 लाख स्क्वायर फीट उत्पादन करती हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट महंगा और डिमांड घटने से काम प्रभावित हुआ है। अजोलिया का खेड़ा इकाई के अध्यक्ष राकेश चोपड़ा के अनुसार, एक्सपोर्ट में 15-20% तक नुकसान हो रहा है। कंटेनर अटके हैं और शिपिंग चार्ज बढ़ने से लागत बढ़ गई है। पद्मिनी मार्बल के श्याम भंडारी के अनुसार, ईरान, इराक, चीन और इटली से सप्लाई प्रभावित है। केमिकल की कीमतों में 30-50% बढ़ोतरी से उत्पादन लागत बढ़ गई है। आदिमाता मार्बल के रूपेश चौधरी ने बताया कि कंटेनर दरें, शिपिंग चार्ज और आयातित मटेरियल की लागत बढ़ गई है, जिससे पूरा उद्योग प्रभावित है। 2. जालोर- 50% ग्रेनाइट फैक्ट्रियां बंद, श्रमिकों का पलायन शुरू ग्रेनाइट के सबसे बड़े हब जालोर में पिछले 40 दिनों में सन्नाटा पसर गया है। उत्पादन में गिरावट : 13 लाख वर्ग फीट प्रतिदिन की क्षमता अब सिमटकर 4.55 लाख वर्ग फीट रह गई है। रोजगार संकट : 1032 में से अब केवल 600 यूनिट्स ही जैसे-तैसे चल रही हैं। हर दिन 10% श्रमिक काम न होने के कारण घरों को लौट रहे हैं। 22 प्रतिशत कारोबार एक्सपोर्ट पर आधारित जालोर ग्रेनाइट एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकिशन रणवा ने बताया - ग्रेनाइट का 22% कारोबार एक्सपोर्ट पर आधारित था, जो पूरी तरह ठप हो गया है। पहले प्रतिदिन 20-22 कंटेनर एक्सपोर्ट होते थे और करीब 1.37 लाख स्क्वायर फीट माल बाहर जाता था। इसमें 80% माल UAE जाता था। गुजरात में 250 फैक्ट्रियां बंद का असर राजस्थान पर मोरबी (गुजरात) में सिरेमिक टाइल्स फैक्ट्रियां बंद होने से स्लरी लोडिंग 70% तक गिर गई है। पहले 150 ट्रेलर रोज जाते थे, अब केवल 25 ट्रेलर ही लोड हो रहे हैं। करीब 250 फैक्ट्रियां बंद होने से 6250 श्रमिकों के रोजगार पर संकट है, जबकि कुल मिलाकर 20 हजार से ज्यादा श्रमिक प्रभावित हो रहे हैं। सिलेंडर की कमी और लॉकडाउन की आशंका के कारण श्रमिक पलायन तेज हो गया है। 3. भीलवाड़ा- टेक्सटाइल पर 'डबल मार', ऑर्डर लेने से कतरा रहे खरीदार वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में करीब 1000 करोड़ रुपए के एक्सपोर्ट ऑर्डर अधर में लटके हैं। खाड़ी देशों से कटी सप्लाई : सऊदी, कुवैत और यूएई जाने वाला माल बंदरगाहों पर अटका है। बांग्लादेश संकट का असर : पहले से ही बांग्लादेश संकट झेल रहे यार्न और डेनिम उद्योग के लिए यह युद्ध 'कोढ़ में खाज' साबित हो रहा है। 2 लाख से अधिक लोग कार्यरत मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडस्ट्रियल ऑर्गनाइजेशन के महासचिव आरके जैन ने बताया - शहर में 450 से अधिक कपड़ा, 20 कताई, 21 प्रोसेसिंग यूनिट्स और 5 से अधिक डेनिम उद्योग चल रहे हैं। यहां प्रति माह करीब 10 करोड़ मीटर कपड़े का उत्पादन होता है। इन यूनिट्स में 2 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। सऊदी अरब, कुवैत, कतर, यूएई और ओमान में निर्यात प्रभावित होने से उत्पादन पर असर पड़ा है। कई खेप बंदरगाहों पर अटकी हैं और विदेशी खरीदारों ने ऑर्डर अस्थायी रूप से रोक दिए हैं। राहत पैकेज देने की मांग बांग्लादेश संकट के कारण यार्न और डेनिम सप्लाई भी प्रभावित हुई है, जिससे उद्योग को दोहरा झटका लगा है। विदेशी भुगतान अटकने से उद्यमियों के सामने वर्किंग कैपिटल का संकट खड़ा हो गया है। मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आरबीआई से 6 महीने का मोरेटोरियम और राहत पैकेज देने की मांग की है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली, तो हजारों श्रमिकों के रोजगार और पूरे टेक्सटाइल सेक्टर के अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। आखिर क्यों बिगड़े हालात… 4 मुख्य कारण शिपिंग चार्ज : कंटेनर किराया 5 से 6 गुना बढ़ गया है, जिससे एक्सपोर्ट घाटे का सौदा बन गया। रॉ मटेरियल : ईरान और इटली से आने वाले ब्लॉक्स की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट गई है। वर्किंग कैपिटल : विदेशी भुगतान (Payments) अटकने से फैक्ट्रियों के पास रोजमर्रा के खर्च के पैसे नहीं बचे हैं। होल्ड चार्ज : पोर्ट पर माल रुकने से शिपिंग कंपनियां भारी-भरकम जुर्माना वसूल रही हैं। आरबीआई दे राहत पैकेज मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव आरके जैन कहते हैं- स्थिति अत्यंत गंभीर है। हमने आरबीआई से 6 महीने का मोरेटोरियम और विशेष राहत पैकेज की मांग की है। अगर जल्द हस्तक्षेप नहीं हुआ तो हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इस तरह हो रहा नुकसान… चित्तौड़गढ़ : 50% उत्पादन घटा। जालोर: 432 फैक्ट्रियां हुईं बंद। भीलवाड़ा: 30% तक बढ़ी उत्पादन लागत। ---------------- ये खबरें भी पढ़िए… राजस्थान में फैक्ट्रियां खालीं, टूरिस्ट भी नहीं आ रहे, व्यापारी बोले- काम बंद, मजदूर गए ईरान-इजराइल युद्ध से उदयपुर का हैंडीक्राफ्ट बिजनेस भी प्रभावित हुआ। व्यापारियों का दावा है कि इसका असर लंबा चलने वाला है। पूरी खबर पढ़िए राजस्थान में बंद हो सकती हैं सैकड़ों फैक्ट्रियां, हजारों मजदूरों को छुट्‌टी पर भेजा अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते कोटा के सैंड स्टोन, राइस और मसाला इंडस्ट्रीज प्रभावित हुए हैं। डिमांड घटने से करीब 150 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट अटक गया है। पूरी खबर पढ़िए...