राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' अभियान के तहत जजेज हर मंगलवार को स्कूल में जाकर छात्र-छात्राओं को अलग-अलग विषय पर जागरूक कर रहे हैं। इस अभियान की शुरुआत 7 अप्रेल को रालसा के निर्देश पर पूरे राजस्थान में हुई थी। अभियान के तहत प्रत्येक मंगलवार को प्रदेशभर में विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिवों के साथ-साथ जिला एवं सत्र न्यायाधीश, एडीजे, सीजेएम, एसीजेएम और मजिस्ट्रेट के पद पर कोर्ट में मामलों को सुनने वाले जज स्कूलों में जाकर बच्चों को सामाजिक विषयों, कुरूतियों, अपराध के प्रति जागरूक करने का काम कर रहे हैं। इसी क्रम में इस मंगलवार को शहर में जयपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पवन जीनवाल ने महाराजा गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, छोटी चौपड़ में छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों और उसके परिणामों के प्रति जागरूक किया। नशे को 'ना' कहना सीखे जज पवन जीनवाल ने छात्राओं को जागरूक करते हुए कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, शिक्षा, भविष्य एवं सम्पूर्ण समाज को भी प्रभावित करता है। उन्होंने छात्राओं को समझाया कि नशे की शुरुआत अमूमन जिज्ञासा, साथियों के दबाव, तनाव, सोशल मीडिया के प्रभाव, गलत संगति और क्षणिक आकर्षण के कारण होती है। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन और दबाव में आकर नशे का सेवन न करें। वहीं आत्मविश्वास के साथ 'ना' कहना सीखें। नशा एक अपराध, सजा का प्रावधान उन्होंने छात्राओं को भारत में मादक पदार्थों से संबंधित प्रचलित कानूनों, विशेष रूप से एनडीपीएस एक्ट के प्रमुख प्रावधानों से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मादक पदार्थों का अवैध उत्पादन, क्रय-विक्रय, परिवहन, भंडारण एवं सेवन कानूनन दण्डनीय अपराध है तथा इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को यह भी बताया गया कि यदि उनके आसपास किसी प्रकार की नशे से संबंधित गतिविधि, मादक पदार्थों की बिक्री अथवा किसी छात्र या व्यक्ति के नशे की गिरफ्त में होने की जानकारी मिले, तो वे अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को तत्काल सूचित करें। उन्होने इस मौके पर छात्राओं के सवालों के जवाब भी दिए।