राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सोमवार को सीकर में कहा कि सरकार नगर निकाय चुनाव की तर्ज पर अब पंचायत चुनाव में भी धांधली करके जीत हासिल करना चाहती है, लेकिन राजस्थान के गांवों की जनता ऐसा कतई नहीं होने देगी। डोटासरा ने UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा को सीकर नगर परिषद के मास्टर प्लान निरस्त होने का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा- 5 करोड़ खर्च कर मास्टर प्लान का ड्राफ्ट बना था वो पैसे अब बेकार चले गए। सीकर की जनता सरकार से जवाब चाहती है। वहीं डोटासरा ने कहा कि निकाय चुनावों में बोर्ड बनाने के लिए जिस तरह से पुलिस और प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया गया, वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। सरकार ने पहले ढाई साल तक चुनावों को टालकर पूरे राजस्थान का विकास ठप्प कर दिया। शेखावाटी में यमुना के पानी के मुद्दे पर डोटासरा ने कहा कि सरकार बार-बार इसका ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक जमीन पर एक बूंद पानी भी नहीं पहुंचा है। डोटासरा बोले- मास्टर प्लान निरस्त करना धोखा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा- सीकर के मास्टर प्लान का प्रारूप प्रकाशन होने के बाद निरस्त करना बड़ा धोखा है। डोटासरा ने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार थी तो लगभग 5-6 महीने में ही मास्टर प्लान पूरी तरीके से तैयार होकर अधिसूचना जारी हो गई थी। लेकिन आचार संहिता लगने से मामला अटक गया था। भाजपा ने सरकार में आने के बाद प्रारूप प्रकाशन किया और अब मास्टर प्लान को बिना कारण बताए निरस्त कर दिया। 5 करोड़ बेकार गए- डोटासरा डोटासरा ने कहा कि मास्टर प्लान का प्रारूप एमएनआईटी ने 5 करोड़ रूपए की लगात से तैयार किया था। उसके आधार पर यूआईटी ने नए गांव जोड़े थे। अब मास्टर प्लान निरस्त होने से 5 करोड़ रूपए बेकार गए और जो नए गांव जोड़े वो अधरझूल में हैं। मास्टर प्लान के अनुसार सुविधा क्षेत्राें को चिन्हित किया गया था, लोगों ने उस हिसाब से रेजीडेंशियल और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी ली थी। मास्टर प्लान निरस्त होने के कारण यूआईटी क्षेत्र के लोग नए मास्टर प्लान में रिहायशी इलाके सुविधा क्षेत्र बनने की संभावना से परेशान हैं। 38 गांव ना ग्रामीण क्षेत्र में ना शहरी- डोटासरा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने कहा- यूआईटी ने मास्टर प्लान के तहत 38 गांवाें को शामिल किया था। अब वहां ग्रामीण क्षेत्र के नियम लागू नहीं हो रह। इधर मास्टर प्लान निरस्त होने से वो 38 गांव शहरी क्षेत्र में भी नहीं गिने जाते। ऐसे में सीकर जिला मुख्यालय समेत 38 गांवों में विकास के काम ठप्प हो गए हैं। यूआईटी के पास गांवों को शामिल करने की कोई प्लानिंग नहीं है। मास्टर प्लान की आपत्तियों के निस्तारण के बाद प्रारूप प्रकाशन किया गया था, उसके बावजूद मास्टर प्लान को निरस्त करना राजनीतिक दुर्भावना है। सीकर की जनता वजह जानना चाहती है- गोविंद सिंह डोटासरा डोटासरा ने कहा- UDH मंत्री का कहना है कि निरस्त हुए मास्टर प्लान से कांग्रेस नेताओं को फायदा होने वाला था। ऐसा लगता है तो जांच करवा लेनी चाहिए। भाजपा के नेताओं से आगामी समय में जवाब मांगा जाएगा। सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने डेढ़ साल तक इसका लीगल टेस्ट कराया और खुद UDH मंत्री ने प्रारूप जारी किया था। अब अचानक इसे रद्द करने की असली वजह सीकर की जनता जानना चाहती है। डोटासरा ने सवाल उठाया कि प्रारूप तैयार करने वाली एजेंसी को लगभग 4.5 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। मास्टर प्लान रद्द होने के बाद इस भारी-भरकम राशि की वसूली किससे की जाएगी? 1 नवंबर को लोकतंत्र बचाओ आंदोलन में 1 लाख लोग पहुंचेंगे डोटासरा ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ 1 नवंबर को दिल्ली में लोकतंत्र बचाओ आंदोलन का आयोजन किया जा रहा है। इस विशाल रैली में राजस्थान के सभी विधानसभा क्षेत्रों से 1 लाख से अधिक कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचेंगे।